Male: Huge crowd spill out against Abdulla Yameen
मालदीव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जहां अपने आदेश पर अमल का पालन करने को कहा है, वहीं सरकार ने पुलिस और सेना को आदेश दिया है कि वे राष्ट्रपति की गिरफ्तारी या उन पर महाभियोग चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दें। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भारत समेत सभी लोकतांत्रिक देशों से देश में कानून का शासन बनाए रखने में मदद मांगी है। इसके बाद मालदीव में लोगों ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का विरोध करना शुरू कर दिया था, सड़कों पर उतरकर भी लोगों ने राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं मालदीव सेना को हाई अलर्ट कर दिया गया।
वहीं इसके फौरन बाद राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने कहा था कि उन्हें गुमनाम धमकियां मिल रही हैं जिसकी वजह से वह जज अली हमीद और न्यायिक प्रशासक हसन सईद के साथ अदालत में रात बिताएंगे। वहीं सशस्त्र बल और पुलिस सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा में तैनात है।
यह छोटा सा पर्यटक द्वीपसमूह उस वक्त सियासी संकट में घिर गया जब सुप्रीम कोर्ट ने यामीन सरकार के खिलाफ टिप्पणी की। असंतुष्टों के खिलाफ यामीन की कार्रवाई ने छुट्टियों के लिए स्वर्ग कहे जाने वाले इस देश की छवि को खासा नुकसान पहुंचाया है।
बृहस्पतिवार को न्यायाधीशों ने अधिकारियों को नौ राजनीतिक असंतुष्टों की रिहाई और उन 12 विधायकों की फिर से बहाली का आदेश दिया था जिन्हें यामीन की पार्टी से अलग होने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि यह मामले राजनीति से प्रेरित थे।
यामीन सरकर ने अदालत के इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया था। उसने संसद की कार्रवाई रोक दी है और अदालती आदेश के अनुपालन के अंतरराष्ट्रीय आह्वान को भी खारिज कर दिया है।
रविवार को राष्ट्रीय टेलीविजन पर दिए गए अपने संदेश में अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अनिल ने कहा कि सरकार इसे नहीं मानती। अनिल ने कहा, ‘राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने का सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला असंवैधानिक और अवैध है। इसलिए मैंने पुलिस और सेना से कहा है कि किसी भी असंवैधानिक आदेश का अनुपालन न करें।’