1960 के दशक में सोवियत संघ और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लेकर चली होड़ से दुनिया वाकिफ है।
लेकिन बहुत कम लोगों का याद होगा कि उसी जमाने में एक तीसरा देश भी इस दौड़ में शामिल था। यह देश था लेबनान। लेबनानी रॉकेट सोसाइटी बेरूत विश्ववद्यालय का एक विज्ञान क्लब था। इस सोसाइटी पर हाल ही में एक फिल्म बनी है।
मनॉग मनॉगियन कहते हैं, "मेरा उद्देश्य था अंतरिक्ष की पड़ताल करना। लेबनान ऐसा कर सकता था।"
मनॉगियन की बात किसी को दंभपूर्ण और कपोल-कल्पित लग सकती है लेकिन 50 साल पहले उन्होंने अपने छात्रों के एक समूह के साथ अरब दुनिया में अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत की थी। बहुत मामूली बजट होने के बावजूद वो अंतरिक्ष की सीमा तक पहुँचने वाला रॉकेट बनाने में सफल रहे थे।
मनॉगियन कहते हैं, "एक छोटा सा देश लेबनान वो कर रहा था जो पूरे अरब जगत में किसी ने नहीं किया था। हम नौजवान बच्चे थे। हमारी उम्र बस 20 से ऊपर ही थी लेकिन हम एक अविश्वनीय कार्य कर रहे थे।"
विज्ञान में रुचि
बहुत मामूली बजट होने के बावजूद वो अंतरिक्ष की सीमा तक पहुँचने वाला रॉकेट बनाने में सफल रहे। मनॉगियन की विज्ञान में रुचि जूल्स वर्ने के उपन्यासों को पढ़कर जगी। उनका बचपन पश्चिमी तट के जेरीचो शहर में गुजरा था।
वो अक्सर पास स्थित माउंट ऑफ टेंपटेशन पर जाकर आसमान को निहारते हैं। स्कूल में वो अपनी मेज पर रॉकेट के चित्र बनाया करते थे।
अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय से गणित और भौतिकी की पढ़ाई करने के बाद मनॉगियन लेबनान वापस लौटे और 25 साल की उम्र में बेरूत के एक छोटे से कॉलेज हैगेज़ियन में पढ़ाने लगे।
नवंबर, 1960 में उन्होंने विज्ञान क्लब का नाम बदलकर हैगेज़ियन कॉलेज रॉकेट सोसाइटी कर दिया।
मनॉगियन कहते हैं, "मेरे लिए यह आश्चर्यजनक था लेकिन बहुत से लड़कों ने इस क्लब से जुड़ना तय किया। मेरे पास कोई पैसा नहीं था। ऐसे कामों के लिए मदद भी कम थी। लेकिन मुझे लगा कि मैं अपनी तनख्वाह में कुछ बचत कर सकता हूँ और अपनी पत्नी को प्रयोग के सामान ख़रीदने के लिए राजी कर सकता हूँ।"
हमने अपना प्रोटोटाइप रॉकेट गत्ते और पाइप से बनाया था और बेरूत के एक पहाड़ से इसका परीक्षण किया था।
पहला प्रक्षेपण
नवंबर, 1960 में उन्होंने विज्ञान क्लब का नाम बदलकर हैगेज़ियन कॉलेज रॉकेट सोसाइटी कर दिया। मनॉगियन याद करते हैं,"कॉलेज के लोग पहला लांच देखने के लिए आए था। रॉकेट में आग लगाते ही यह पीछे की तरफ पहाड़ों में चला गया और एक चर्च के पास गिर पड़ा।"
मनॉगियन और उनके सात छात्रों ने अपने डिज़ाइन को सुधारा और रॉकेट लांच करने की उनकी महत्वाकांक्षा भी बढ़ गई।
हर छात्र को इसके अलग भाग की जिम्मेदारी दी गई और अप्रैल, 1961 तक यह रॉकेट 1000 मीटर की ऊंचाई तक जाने लायक हो गया था। दूसरा रॉकेट 2000 मीटर की ऊंचाई तक गया।
इस रॉकेट के बारे में जब ख़बर फैली तो लेबनानी सेना ने इसमें रुचि दिखाई। सेना के बैलेस्टिक आयुधों के विशेषज्ञ युसूफ़ वेहेबे को उनकी मदद करने के लिए नियुक्त किया।
वेहेबे फ्रांस और अमेरिका से ऐसे कलपुर्जे प्राप्त करने में सफल रहे जिन्हें अन्यथा पाना मुश्किल ही था। वेहेबे ने सेना की फैक्ट्री में जटिल कलपुर्जे बनाने की व्यवस्था भी की।
फिर भी मनॉगियन मानते हैं कि उनकी परियोजना पूरी तरह वैज्ञानिक थी।
मनॉगियन कहते हैं, "हमारे प्रक्षेपण में सेना और जनता दोनों शामिल होते थे। सेना वाले हमसे अक्सर पूछते रहते थे कि अगर इस पर इतना वज़न रख दिया जाए तो यह कितना दूर जाएगा। लेकिन मेरा जवाब होता था कि यह सेना का कार्यक्रम नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चों को विज्ञान पढ़ाना है।"
राष्ट्रपति की दावत
मनॉगियन मानते हैं कि उनकी परियोजना पूरी तरह वैज्ञानिक थी। हैगैज़ियान कॉलेज रॉकेट सोसाइटी इस समय तक लेबनान में राष्ट्रीय गौरव बन चुकी थी।
मनॉगियन को राष्ट्रपति ने रात के भोज पर बुलाया और बताया कि शिक्षा मंत्रालय उन्हें वर्ष 1962 और 1963 के लिए सीमित आर्थिक मदद करेगा।
सोसाइटी का नाम बदलकर लेबनानी रॉकेट सोसाइटी कर दिया गया और रॉकेट कार्यक्रम में लेबनान के राष्ट्रीय चिह्न का प्रयोग किया जाने लगा।
अब लेबनान अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल हो चुका था, हालाँकि उसकी रफ़्तार थोड़ी धीमी थी।
मनॉगियन बताते हैं, "हम थर्मोस्फीयर तक पहुँचने में सक्षम थे।"
डाक टिकट
इस टीम द्वारा बनाया गए सेडार IV का प्रक्षेपण इतना सफल रहा कि इस पर एक डाक टिकट जारी किया गया। रॉकेट प्रक्षेपण पर लेबनान में डाक टिकट जारी किया जारी किया गया था।
यह 145 किलोमीटर ऊँचाई तक गया था। पृथ्वी के उपग्रह पथ की निचली कक्षा के यह काफी क़रीब था। मनॉगियन को जानकारी नहीं थी लेकिन लेबनानी सेना के उनकी सोसाइटी के लिए कुछ और ही योजना थी।
वो पहले ही एक समिति बना चुके थे जिसे विचार करना था कि यह रॉकेट कितना वज़न लेकर जा सकता है।
युसूफ वेहेबे उनके आदमी के रूप में सोसाइटी में मौजूद थे। लेकिन मनॉगियन की योजना कुछ और थी।
अंतरिक्ष में चूहा !
मनॉगियन याद करते हुए कहते हैं, "उस दौर में जब सोवियत संघ और अमेरिका अंतरिक्ष में जानवर और इंसान भेज रहे थे। तब हम एक चूहे को प्रशिक्षित कर रहे थे जो उच्च त्वरण को झेल सके।"
"मैंने अपनी पत्नी ने कहा कि एक पैराशूट बनाओ तो उसने पूछा कि तुम किस चीज को नीचे लाना चाहते हो। मैंने उसे चूहे के बारे में बताते हुए कहा कि हम उसे सुरक्षित नीचे उतारना चाहते हैं। मेरी बीबी बोली, ऐसा मेरी लाश पर होगा। तुम अंतरिक्ष में एक चूहा नहीं भेज सकते!"
चूहा अंतरिक्ष में जाए या न जाए, मनॉगियन का छोटा सा क्लब लेबनान के अख़बारों की सुर्ख़ी बन गया था।
उन्हें हर आम और ख़ास दावत में बुलाया जाने लगा था। उन्हें इस बात की आशंका थी कि दूसरे देशों के एजेंट भी उनके काम पर नज़र रखे हुए थे।
कई बार रात को उनके दफ़्तर के कागजात के संग छेड़छाड़ की गई होती थी। दूसरे अरब देश हमारी क्षमता का प्रयोग अपने आयुध कार्यक्रमों के विकास के लिए करने को बेचैन थे।
मुँहमांगा पैसा
एक अरब देश ने उन्हें मुँहमांगा पैसा और सहयोग देने का प्रस्ताव दिया था।
मनॉगियन कहते हैं, "मैंने वह प्रस्ताव ठुकरा दिया। मुझे इसका अंदाज था कि इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। मैं किसी भी तरह के हिंसा के पूरी तरह ख़िलाफ हूँ।"
मनॉगियन की पत्नी ने उनसे कहा कि तुम अंतरिक्ष में चूहा नहीं भेज सकते। लेकिन इसके साथ ही मनॉगियन की चिंता भी बढ़ती जा रही थी।
और जब वर्ष 1964 में वो परास्नातक की पढ़ाई करने के लिए अमेरिका वापस गए तो उस बीच उनके क्लब में जो हुआ उससे उन्हें एहसास हो गया कि सोसाइटी पर नियंत्रण रखना उनके लिए ही कठिन है।
एक छात्र ने उनके मना करने के बाद भी रॉकेट को प्रोपैलेंट ईंधन के साथ प्रक्षेपित करने की तैयारी की थी लेकिन उसी दौरान ईंधन में आग लग गई। इस दुर्घटना में हैंपर कैरागुज़ियान नामक इस छात्र की एक आँख चली गई। उसके दोनों हाथ भी बुरी तरह जल गए।
मनॉगियन बताते हैं, "प्रयोगशाला के बाहर मौजूद एक अन्य छात्र ने हैंपर को बचाने की कोशिश की परिणामस्वरूप वह भी जल गया। यह एक बड़ा हादसा था।"
दुर्घटना और अंत
साल 1966 में किए गए एक प्रक्षेपण के साथ ही इस सोसाइटी का अंतरिक्ष कार्यक्रम रुक गया। इस प्रक्षेपण में भी हादसा होते-होते रह गया था। यह परीक्षण भूमध्य सागर में किया गया।
साइप्रस से सुरक्षित दूरी पर होने के बावजूद रॉकेट ने गलत पथ ले लिया था और यह रॉकेट इस प्रक्षेपण की निगरानी कर रहे ब्रितानी सैन्य पोत से कुछ ही मीटर पहले गिरा था।
लेबनान रॉकेट सोसाइटी एक दुर्घटना के बाद बंद हो गई। मनॉगियन मुझसे कहते हैं,"इस कार्यक्रम को बंद करने का वक़्त आ गया था।"
मनॉगियन को अमरीकी दूतावास में काम करने वाले मित्रों ने सचेत किया कि इसराइल से टकराव हो सकता है।
जब इसराइल के साथ वर्ष 1967 में छह दिन का युद्द हुआ तब तक मनॉगियन अपना अकादमिक करियर बनाने के लिए अमेरिका जा चुके थे।
लेबनानी रॉकेट सोसाइटी की यादें जल्द ही धुंधली पड़ गईं। इससे जुड़े दस्तावेज़ लेबनान में हुए गृहयुद्ध के दौरान नष्ट हो गए। इस सोसाइटी में शामिल बहुत से छात्र विदेशों में काम करने के लिए चले गए।
इस सोसाइटी के नाम वाले ही एक वृत्तचित्र के बनने के बाद लोगों में मनॉगियन के काम में रुचि जगी है।
मनॉगियन कहते हैं, "हाँ, यह बहुत छोटा सा देश है लेकिन लेबनान अंतरिक्ष में अपना उपग्रह भेज सकता था।"