पनामा दस्तावेजों के खुलासे का केंद्र रहे लॉ फर्म के संस्थापकों में से एक रैमन फोनसेका ने कहा है कि विदेश में रखे सर्वरों के जरिए कंपनी को हैक किया गया है। उन्होंने कहा कि लॉ फर्म मोसेक फोनसेका ने पनामाई अभियोजक के पास सोमवार को आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा कि अब तक की रिपोर्टिंग में किसी ने भी हैकिंग की चर्चा नहीं की है। वास्तव में यही एक अपराध किया गया है। उन्होंने यह नहीं बताया कि किस देश से हैकिंग की गई। फोनसेका ने इस वास्तविकता पर अफसोस जताया कि मोसेक फोनसेका की कंप्यूटर प्रणाली से उड़ाए गए 1.15 करोड़ दस्तावेज हाई प्रोफाइल ग्राहकों के थे। इन ग्राहकों ने इस लॉ फर्म के जरिए विदेशी कंपनियां बनाई थीं। पनामा ने ओईसीडी द्वारा अपने ऊपर लगाए गए कालाधन छुपाने की जगह वाले आरोप को भी खारिज कर दिया है।
पनामा के उप विदेश मंत्री लुईस मिगुल हिनकैपी ने मंगलवार को ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के एंजेल गुरिया को पत्र लिखकर कहा कि उन्होंने ‘ऐसे आरोप और आक्षेप लगाएं हैं जिनके झूठ आसानी से प्रदर्शित होते हैं। गुरिया ने अपने बयान में कहा था कि ‘पनामा दस्तावेजों के खुलासे से पनामा की संस्कृति और गोपनीयता बरतने की प्रक्रिया उजागर होती है। पनामा ऐसी जगह है जो विदेश में टैक्स और कानून प्रवर्तन विभागों से पैसे छुपाने की अनुमति देना जारी रखा हुआ है।’
ओईसीडी ने आरोप लगाया था कि पनामा के वित्तीय लेनदेन को और ज्यादा पारदर्शी बनाए जाने की जरूरत है। ओईसीडी का कहना है कि वित्तीय सूचनाओं के ऑटोमेटिक आदान-प्रदान के मामले में पनामा अब भी काफी पीछे है। हिनकैपी ने अपने पत्र में लिखा है कि पनामा की कंपनियों के नियम मूल रूप से किसी दूसरे महत्वपूर्ण वित्तीय न्यायक्षेत्र से भिन्न नहीं हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि आधी विदेशी कंपनियां ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में पंजीकृत हैं जहां ब्रिटेन का कानून चलता है। हिनकैपी के अनुसार, अमेरिका का डेलावेयर कंपनी के मालिकों को पूरी गोपनीयता बरतने की अनुमति देता है।