सबसे पहले तो अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन का माखौल उड़ाया और फिर कुछ ही घंटों के बाद कहा कि वे भविष्य में अच्छे दोस्त बन सकते हैं। ट्रंप के एशिया दौरे को लेकर कुछ ऐसे विरोधाभास देखने को मिले।
ट्रंप एशिया के पांच देशों की यात्रा पर हैं और कूटनीतिक पर्यवेक्षक अमरीकी राष्ट्रपति के रवैये को समझने की कोशिश में उलझे हुए हैं। ट्रंप अभी आसियान बैठक के लिए फिलीपींस में हैं और एशिया दौरे से ट्रंप की जल्द ही घर वापसी हो जाएगी।
इस इलाके में ऐसे लोग हो सकते हैं जो ट्रंप के दौरे से हुए बड़े फायदे की बात पर यकीन रखते हों लेकिन ये जरूरी नहीं है कि अमरीका को भी इसका कुछ लाभ हो। इसमें कोई शक नहीं कि ट्रंप जहां कहीं भी गए, वहां उनका स्वागत किसी राजा की तरह हुआ।
बेशक ट्रंप को अपनी तारीफ अच्छी लगती हो, खासकर घरेलू मोर्चे पर हो रही आलोचनाओं के मद्देनजर। विदेशी जमीन पर अगर ट्रंप का शाही स्वागत किया जाता है तो वे विनम्र मेहमान की तरह पेश आते हैं। मानवाधिकार और लोकतंत्र जैसे असहज करने वाले मुद्दों से ट्रंप किनारा कर चुके हैं।
पढ़ें: चीन के मुकाबले खड़ा होगा भारत, एपेक में सदस्यता के लिए ट्रंप देंगे समर्थन
जब उत्तर कोरिया ने राष्ट्रपति ट्रंप को 'सठियाया हुआ' कहकर बार-बार मजाक उड़ाया तो ट्रंप ने जवाब में किम जोंग उन को 'नाटा और मोटा' कहा। ऐसा लग रहा था कि एशिया के जिन देशों के दौरे पर ट्रंप हैं, उनके नेताओं ने सादगी और भलमनसाहत से मेजबान की भूमिका अदा की।
लेकिन कहीं न कहीं इसका एहसास भी हो रहा है कि मानो वे ट्रंप के दौरे को लेकर तैयार थे, जैसे उन्हें ऐसा कुछ नहीं करना है जिससे ट्रंप भड़क जाएं या फिर खुशामद और तारीफ के हथियार से ट्रंप को निहत्था करने के बारे में उन्होंने पहले से सोच रखा था।