अमेरिकी जासूसों ने अपनी पड़ताल में पता लगाया कि ये कोई नकल नहीं बल्कि असली अंतरिक्ष यान लूना है जिसमें से इंजन और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट निकाल दिया गया है। हालांकि, इस अंतरिक्ष यान के बारे में गहरी जानकारी के लिए उन्हें इसे प्रदर्शनी हॉल के बाहर निकालकर देखना था जहां सोवियत संघ के गार्ड्स का भारी पहरा हुआ करता था। इसके बाद सीआईए ने एक जासूसी फिल्म की कहानी जैसी योजना बनाई।
ये योजना बनाई गई कि सीआईए के एजेंट्स अंतरिक्ष यान लूना के एक शहर से दूसरे शहर में होने वाले ट्रांसफर पर नजर रखेंगे। सीआईए एजेंट्स ने ये सुनिश्चित किया कि इस ऑपरेशन के दिन अंतरिक्ष यान आखिरी ट्रक में ट्रैवल करेगा। इसके बाद स्थानीय लोगों की तरह कपड़े पहने हुए अमेरिकी एजेंटों ने आखिरी स्टॉप पर ट्रक को रोक लिया। आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, "इसके बाद ट्रक के ड्राइवर को होटल भेज दिया गया जहां उसने रात बिताई।
इसके बाद ट्रक को तुरंत एक स्क्रैप यार्ड ले जाया गया जिसे फौरी तौर पर किराए पर लिया गया था।" लगभग तीस मिनट तक सीआईए एजेंटों ने इस बात की पुष्टि करने की कोशिश की कि कहीं सोवियत संघ को किसी तरह की गड़बड़ होने की भनक तो नहीं लगी है। इसके बाद लगभग साढ़े सात बजे सीआईए से वो जासूस पहुंचे जिन पर वैज्ञानिक जानकारी हासिल करने की जिम्मेदारी थी।
इन जासूसों को पता था कि अंतरिक्ष यान लूना को लेकर जाने वाला कंटेनर अंदर से बंद था। इसमें बिना किसी को भनक लगे सिर्फ छत के रास्ते घुसा जा सकता था। ऐसे में उन्हें रस्सी के सहारे अंदर जाना पड़ा। इसके साथ ही उन्हें अपना काम बांटना पड़ा। दो एजेंट्स इंजन वाले हिस्से में गए। वहीं, दो एजेंट्स उस हिस्से में पहुंचे जहां दो इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट गायब थे। इस दूसरे हिस्से में एक सोवियत सील लगी हुई थी। सीआईए के दस्तावेजों के मुताबिक, उन्होंने ये सील तोड़ी और सीआईए के दफ्तर में बनी हुई सील लगाई।
इस कंटेनर में फ्लैशलाइट्स से रोशनी पैदा करके सीआईए एजेंट्स ने लूना के मुख्य हिस्सों को निकालकर उनकी तस्वीरें लीं और वापस उन्हें पहले जैसा लगा दिया। सीआईए के एक दस्तावेज के मुताबिक, "हमने अपने सारे उपकरण सुबह 4 बजे तक समेट लिए और हमारी कार हमें बिठाकर ले गई।" इसके बाद सोवियत गार्ड्स के आने से पहले कारगो को
रेलवे यार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ट्रक के असली ड्राइवर पर थी। सीआईए के मुताबिक, आजतक एक भी संकेत ऐसा नहीं मिला है कि सोवियत संघ के अधिकारियों को इसकी भनक थी कि उनके अंतरिक्ष यान को एक रात के लिए अगवा कर लिया गया था।
सीआईए के इस ऑपरेशन में हासिल हुई जानकारी अमेरिका के लिए अहम साबित हुई। इससे पहले, सीआईए द्वारा साल 1994 में जारी किए गए एक अन्य दस्तावेज के मुताबिक अमेरिकी जासूस इंजन जैसे तमाम दूसरे हिस्से के आकार और वजन को जानने में सक्षम हो गए थे। इसके बाद अमेरिका को अपनी स्पेस तकनीक पर पुनर्विचार करने का मौका मिला। हालांकि, आने वाले सालों में सोवियत संघ यूरी गागरिन को अंतरिक्ष पर पहुंचाने में सफल हुआ। अमेरिका की बात करें तो
अमेरिका 20 अप्रैल 1969 को अपने अंतरिक्ष यान अपोलो 11 से नील आर्मस्ट्रॉन्ग को चांद पर पहुंचाने में सफल रहा था।