इटली की सुप्रीम कोर्ट ने एक सिख को सार्वजनिक रूप से कृपाण धारण करने की अनुमति नहीं दी है। अदालत ने कहा कि पश्चिमी दुनिया में बसने वाले प्रवासियों को यहां के मूल्यों का आवश्यक रूप से पालन करना चाहिए।
इतालवी न्यूज एजेंसी एएनएसए ने खबर दी कि इटली की शीर्ष अदालत ने सोमवार को एक भारतीय सिख प्रवासी के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। यह व्यक्ति सिख धर्म के पवित्र चिह्नï को धारण करने की अनुमति चाहता था, जो इटली के कानून के खिलाफ है।
अदालत ने कहा कि जिन प्रवासियों ने पश्चिमी दुनिया में बसने का निर्णय लिया है, उनका दायित्व है कि वे यहां के सामाजिक मूल्यों का पालन करें भले ही यह उनके मूल्यों से अलग हों। अदालत ने कहा कि मेजबान देश के कानूनों का उल्लंघन करने वाले मूल्यों से जुड़े रहना असहनीय है।
भले ही यह मूल देश में कानून सम्मत हो। बीबीसी ने स्थानीय मीडिया के हवाले से खबर दी थी कि सिख व्यक्ति उत्तरी इटली में गोइटो स्थित अपने घर से निकले समय २० सेमी के कृपाण के साथ पकड़ा गया था। एक अदालत ने उस पर दो हजार यूरो का जुर्माना लगाया था। ऐसे में सिख व्यक्ति ने अदालत के इस फैसले के खिलाफ अपील की थी।