किसी अपने का गुजर जाना बेहद तकलीफदेह वाकया होता है। किसी परिजन की मौत के बाद हम उसका अंतिम संस्कार करते है। उसकी याद में पत्थर लगाते है।
मगर कई बार क़ुदरत हमें इसका मौका नही देती। बहुत से लोगों की समुद्र में डूबकर मौत हो जाती है। ऐेसे लोगों के लिए कोई कब्र नहीं बनती। उन्हें दफनाया नहीं जाता। उन्हें याद करने का कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता।
मगर, अभी हाल ही में तुर्की में समुद्र तट के करीब लहरों के बीच कब्रिस्तान बनाया गया है। ये कब्रिस्तान उन चार हजार सीरियाई नागरिकों की याद में बनाया गया है। जो सीरिया से यूरोप जाते वक्त समुद्र में डूब गए।
बिल्कुल संगमरमर जैसे दिखने वाले स्टाइरोफोम के ये पत्थर, एक कतार में लगाए गए है। इन्हें ऐसे बांधकर रखा गया है जिससे कतार न बिगड़े। ये यूं ही हमेशा तैरते रहेंगे। और समुद्र में डूब गए उन चार हजार
लोगों की याद दिलाते रहेंगे।
लहरों पर तैरता ये कब्रिस्तान, कभी न खत्म होनेवाले दर्द की याद दिलाता रहेगा। वैसे तो इन पत्थरों को ऐसे भी बनाया जा सकता था कि ये डूब जाते। मगर इन्हें जान-बूझकर तैरता रखा गया है। ताकि इस तकलीफ की यादें हमेशा ताजा रहें।
इसका एक और मकसद है। उन लोगों को श्रद्धांजलि देना जो समुद्र के खतरनाक सफर के दौरान अपनी जान गंवा बैठे। वैसे कला की दुनिया में ऐसी मौतों ने कई लोगों को प्रेरणा दी है।
जैसे ब्रिटिश कवि जॉन मिल्टन ने अपने स्कूल के दिनों के साथी की मौत की याद में 'लाइसिडस' नाम की कविता लिखी थी। इसी तरह पेंटर जे एम डब्ल्यू टर्नर ने अपने साथी कलाकार डेविड विल्की की याद में
'पीस-बरियल ऐट सी' नाम से पेंटिंग बनाई।