इस साल की शुरुआत में 15 जनवरी को आतंकियों ने काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर राकेट से हमला किया था। इससे दूतावास की इमारत के एक कोने को नुकसान पहुंचा था, लेकिन सभी कर्मचारी सुरक्षित रहे। राकेट आईटीबीपी के बैरक में गिरा था।
इससे पहले चार जनवरी, 2016 को भी अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास पर चार बंदूकधारियों ने हमला कर दिया था। बीस मिनट तक गोलाबारी चली। इसमें से दो आतंकियों को आईटीबीपी के जवानों ने मार गिराया। यह घटना ऐसे समय पर हुई जब इससे कुछ दिन पहले 25 दिसंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान की संसद का उद्धाटन किया था।
2008 में हुआ सबसे बड़ा हमला
सात जुलाई, 2008 को भारतीय दूतावास पर कार से आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 58 लोग मारे गए थे। 150 से ज्यादा घायल हुए थे। इसके बाद 2009 में भी दूतावास पर हमला हुआ, जिसमें 17 लोग मारे गए थे और 63 घायल हुए थे। इसके बाद 26 फरवरी 2010 को काबुल में भारतीय डाक्टरों के रिहाइशी इलाके पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें 18 लोग मारे गए थे।