राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नए नेपाली संविधान के मसले पर भारत और नेपाल के बीच उपजे मतभेद के जल्द दूर होने का भरोसा जताया है। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पारिवारिक हैं। ऐसे में किसी भी तरह के विवाद का हल उसी प्रकार निकाला जाना चाहिए जैसे परिवार में निकाला जाता है।
तीन दिवसीय नेपाल यात्रा में हुए अपने स्वागत से अभिभूत राष्ट्रपति ने नेपाल सरकार को बधाई दी। इस दौरान प्रणब ने एक बार फिर से पाकिस्तान का नाम लिए बिना खिंचाई की। उन्होंने दोनों देशों के बीच दशकों से खुली सीमा की चर्चा करते हुए कहा कि इसको आतंकवाद को पोषित, संरक्षित और पनाह देने वाले देश से बचाना चाहिए।
इसके बाद राष्ट्रपति शुक्रवार देर शाम नेपाल की तीन दिवसीय यात्रा समाप्त कर स्वदेश लौट आए। इससे पहले उन्होंने नेपाल में 23 अहम बैठकें की।
पोखरा और जनकपुर दौरे के क्रम में राष्ट्रपति ने नेपाल के संविधान में मधेसियों को समान अधिकार न मिलने से उपजे विवाद के बारे में कहा कि भारत और खुद उन्हें इसकी निजी रूप से जानकारी है। मगर इस समस्या का समाधान संविधान के जरिए ही निकलेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि नेपाल को भारत के लोकतांत्रिक और बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था से संबंधित अनुभव का लाभ उठाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने इस दौरान हिंदु-बुद्घ सर्किट योजना के तहत जनकपुर में दो धर्मशालाओं के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस सर्किट का निर्माण शीघ्र होगा और इससे दोनेां देशों में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। पोखरा और जनकपुर दौरे के दौरान लोग भारत की तरह ही सड़कों के किनारे राष्ट्रपति का स्वागत करने उमड़े।