सऊदी अरब में स्पॉन्सर करने वाले नियोक्ताओं (कफ़ील) के साथ करार तोड़ने वाले प्रवासी कामगारों को जुर्माना, निर्वासन और देश में प्रवेश पर स्थाई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
पासपोर्ट एजेंसी ने सऊदी अरब के नागरिकों से भी अपील की है कि वे कफाला से किनारा करने वाले कामगारों को अपने यहां काम न दें। कफाला व्यवस्था यानी अप्रवासी कामगारों के लिए स्थानीय प्रायोजक।
एजेंसी का कहना है कि यदि उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें भारी जुर्माना ओर जेल भी हो सकती है। कई मानवाधिकार संगठन पहले भी कफाला व्यवस्था को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। उनके अनुसार यह एक तरह की गुलामी है।
सऊदी अरब में कफाला व्यवस्था लागू है। इसके अनुसार यहां विदेशों से आए कामगारों को स्थानीय प्रायोजक के बगैर रोजगार नहीं मिल सकता। सऊदी अरब में एक करोड़ से ज्यादा विदेशी कामगार हैं।
अब ये सख्ती केवल प्रवासी कामगारों तक ही सीमित नहीं है। कफाला से किनारा करने वाले कामगारों को रोजगार देने वाले स्थानीय लोगों के लिए दिक्कत भी हो सकती है।
सऊदी अरब की पासपोर्ट एजेंसी ने स्थानीय नागरिकों से अनुरोध किया है कि वो करार तोड़कर भागने वाले कामगारों को रोजगार न दें। ऐसा करने पर उन पर भी भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
हालांकि सऊदी सरकार मानती है कि इन नियमों से प्रवासी कामगारों को कोई दिक्कत नहीं है। श्रम मंत्री मुफरेज अल हकबानी का कहना है कि सऊदी अरब में काम करने वाली ज्यादातर श्रमिक खुश हैं।
वो कहते हैं, "ये श्रम बाजार का बड़ा छोटा सा हिस्सा है। हमारे यहां एक करोड़ विदेशी श्रमिक खुशी के साथ काम करते हैं।
जब सऊदी ओजर जैसी कंपनी नियमों का पालन करने में नाकाम रहती है तो इससे हमारे श्रम बाजार की अच्छी छवि नष्ट नहीं होगी। "हालांकि, हाल में जो जानकारियां सामने आई हैं, वो सरकार के दावों के उलट है।