नाईजीरिया की जमफारा राज्य सरकार ने कहा है कि 8000 महिलाओं की शादी करने के लिए मदद की मांग पर विचार किया जाएगा।
महिलाओं के एक गुट ने राजधानी गुसाउ में मार्च की और राज्य की धार्मिक पुलिस को अपनी याचिका सौंपी। जमफारा राज्य में आंशिक रूप से इस्लामी क़ानून भी लागू है।
यहां की परंपरा के मुताबिक महिलाओं को शादी में फर्नीचर लाना होता है लेकिन अपने लिए दूल्हा ढूंढ रही कई महिलाएं ये खर्च नहीं उठा सकतीं।
दहेज जुटाने में मुश्किलजिन महिलाओं ने दूल्हा ढूंढने के लिए मार्च की, वे शादी के लिए दूल्हा-दुल्हन ढूंढने वाली संस्था का हिस्सा थीं।
जमफारा विडोज एसोसिएशन नाम की ये संस्था तलाक़शुदा, विधवा और अनाथ लड़कियों के लिए योग्य मुस्लिम दूल्हे ढूंढने का काम करती है।
नाईजीरिया के प्रीमियम टाइम्स अख़बार के मुताबिक मार्च में हिस्सा लेने वाली महिलाओं का कहना था, "हममें से कई महिलाओं के लिए दो वक्त का खाना भी जुटाना मुश्किल है क्योंकि हमें सहारा देने वाला कोई पुरुष नहीं है।"
जमफारा राज्य के धार्मिक मामलों के कमिश्नर अब्दुलाही मोहम्मद शिनकाफ़ी ने बीबीसी को बताया कि वे इन महिलाओं के हालात और आर्थिक मदद की जरूरत को समझते हैं।
शिनकाफ़ी ने कहा, "ये विधवाएं शादी करना चाहती हैं। और ख़ासकर नाईजीरिया में शादी से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं जिनमें धन मांगा जाता है। इसीलिए इन महिलाओं ने मार्च की और सरकार की तवज्जो चाहती हैं।"
अब्दुल्लाही शिनकाफ़ी का कहना था कि ज़मफ़ारा राज्य ग़रीब लोगों की मदद के लिए हरसंभव कोशिश करता है इसलिए इन महिलाओं की मांग पर ध्यान दिया जाएगा।
सामूहिक विवाह
बीबीसी संवाददाता बशीर अब्दुलाही का कहना है कि नाईजीरिया के उत्तर में कानो राज्य में धार्मिक पुलिस बोर्ड या हिस्बाह अकसर ग़रीब विधवाओं और तलाक़शुदा औरतों के लिए सामूहिक विवाह आयोजित करता है।
इन महिलाओं के शादी के जोड़ों, दुल्हन के लिए दूल्हे को अदा की जाने वाली रकम, और दुल्हन की ओर से फर्नीचर का खर्च हिस्बाह ही उठाता है।
लेकिन जमफारा राज्य के धार्मिक मामलों के कमिश्नर शिनकाफी का कहना था कि बजट संबंधी मुश्किलों की वजह से उनके राज्य में शादी के लिए मदद की मांग कर रही महिलाओं की समस्या का जल्द ही निपटारा नहीं हो पाए।
शिनकाफ़ी ने कहा, "जोड़ों को मिलाना एक बात है लेकिन उनके जीवनयापन का इंतज़ाम करना अलग बात है।"