उत्तर कोरिया ने अपने लोगों को चाहे बाहरी दुनिया से अलग करने की कितनी भी कोशिश की हो लेकिन हर साल करीब 1000 लोग इस देश से भागने में कामयाब हो जाते हैं। ज्यादातर लोग पहाड़ों या फिर नदी के रास्ते चीन पहुंचते हैं। इनमें 70 फीसदी महिलाएं होती हैं। इन्हीं लोगों में से एक हैं ह्यून सूक।
सूक साल 2013 में उत्तर कोरिया से भागने में कामयाब रही थीं। अपने अनुभव को बांटते हुए सूक ने बताया की वो सिर्फ इसलिए उत्तर कोरिया से भागना चाहती थीं ताकि वो दुनिया को उस देश की असलियत बता सकें। सूक ने उत्तर कोरिया से भागने के लिए नदी का रास्ता चुना।
सूक के मुताबिक, "वो नदी ज्यादा चौड़ी नहीं है लेकिन उसकी धार बहुत तेज है। मैंने एक बार वापस मुड़कर नदी से बाहर जाने की कोशिशि की लेकिन उसकी तेज धार में मुझे 20 मीटर अंदर धकेल दिया। नदी बहुत गहरी थी, पानी मेरे सिर तक पहुंच रहा था।"
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सूक ने बताया कि उन्हें तैरना नहीं आता, वो बस बहती हुई चीन तक पहुंच गईं। सूक ने मुताबिक, "मैं किसी तरह हाथ-पैर मारकर खुद को किनारे तक ले जाने की कोशिश कर रही थी। कुछ सैनिकों ने मुझे देखा और पकड़ने की कोशिश की। मुझे देखकर वो चिल्लाए - वहां पर कोई है।"
सूक ने बताया कि वो उन्हें पकड़ना चाहते थे लेकिन नदी की धार इतनी तेज थी कि वो उस तक नहीं पहुंच पाए। 'उत्तर कोरिया का परमाणु खतरा बढ़ रहा है।'
"मेरे सारे कपड़े नदी की तेज धार के कारण फट गए थे। मुझे पता था कि मुझे रोशनी की तरफ जाना है लेकिन मैं रास्ते में ही बेहोश हो गई। पहाड़ से रोड की दूरी ज्यादा नहीं थी लेकिन रेंगते हुए मुझे पहुंचने में तीन घंटे से अधिक लग गए। मुझे कुछ नजर नहीं आ रहा था।" सूक के मुताबिक जब उनकी आंख खुली तो वो एक चीनी के घर पर थीं।