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खुला रहस्य: 4 हजार साल से खा रहे हैं प्याज

Thu, 15 Jan 2015 12:29 PM IST
मैरेक प्रुस्जेविस्ज/बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
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प्याज का प्रयोग आज से 4000 साल पहले भी विभिन्न व्यंजनों में किया जाता था। यह बात पता चली मेसोपोटामिया काल के एक लेख से, जिसे सबसे पहले पढ़ा 1985 में एक फ्रेंच पुरातत्वविद ने। उत्पादन के मामले प्याज दुनिया के सबसे अधिक देशों में पैदा होता है।
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भारत और चीन दुनिया में कुल प्याज उत्पादन का 45 फीसदी प्याज उपजाते हैं लेकिन खाने के मामले में ये दोनों दुनिया के शीर्ष देशों में नहीं है।

येल विश्वविद्यालय के बेबिलोनिया संग्रह में मिट्टी की पट्टी पर अंकित तीन लेख एक खास बात के लिए विख्यात हैं। उन्हें पाककला पर दुनिया की सबसे पुरानी किताब माना जाता है। इन पर लिखी इबारत का भेद उनके लिखे जाने के करीब 4000 साल बाद 1985 में खुला।

मेसोपोटामिया की सभ्यता, इतिहास और पुरातत्व के विशेषज्ञ और भोजन पकाने के शौकीन ज्यां बोटेरो को कुछ लोग इनका अर्थ समझाने का श्रेय देते हैं।

उन्होंने बताया कि इस पट्टी पर बहुत ही परिष्कृत और कलात्मक व्यंजनों को पकाने की विधि लिखी है। एक खास चीज का स्वाद उन लोगों को कुछ ज्यादा ही भाता था।

प्याज परिवार से प्यार

बोटेरो कहते हैं, "प्याज परिवार की सब्ज‌ियां उन लोगों को कुछ ज्यादा ही पसंद थीं।" मेसोपोटामिया के लोग प्याज, हरी प्याज, छोटी प्याज और लहसुन का खाने में प्रयोग करते थे।

प्याज के प्रति प्यार 4000 साल बाद आज भी बरकरार है। दुनिया में पाक-कला की शायद ही कोई ऐसी किताब हो, जिसमें प्याज का ज‌िक्र न हो। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया के करीब 175 देश प्याज पैदा करते हैं। यह संख्या गेहूं पैदा करने वाले देशों से लगभग दोगुनी है।

ज्यादातर खास पकवानों में प्याज जरूर पडता है। कुछ लोग तो मानते हैं कि यह एकमात्र वैश्विक खाद्य पदार्थ है।

कहां से आया प्याज?
खाद्य पदार्थों की इतिहासकार और 'द सिल्क रोड गुर्मे' की लेखिका लॉरा केली कहती हैं, "जेनेटिक विश्लेषण के आधार पर हम मानते हैं कि प्याज मध्य एशिया से आया। ऐसे में मेसोपोटामिया में इसका प्रयोग बताता है कि उस समय तक ही यह काफी सफर कर चुका था। हमें इस बात के सबूत मिले हैं कि यूरोप में कांस्य युग में प्याज का प्रयोग होता था।"

केली कहती हैं कि इसमें कोई संदेह नहीं कि 2000 साल पहले सिल्क रूट से प्याज का कारोबार होता था। उस वक्त तक मेसोपोटामिया के लोग अपने प्याज वाले व्यंजनों का इतिहास लिख रहे थे।

मेसोपोटामिया निवासियों के व्यंजन का जायका चखने के लिए केली ने उन्हीं की विधि से कुछ पकवान बनाकर भी देखे।

हर शख्स एक साल में कितनी प्याज खाता है?

आजकल प्याज का अंतरराष्ट्रीय कारोबार बहुत ज्यादा नहीं होता। करीब 90 प्रतिशत प्याज उसे पैदा करने वाले देश में खप जाता है। शायद यही वजह है कि दुनिया के ज्यादातर हिस्से में प्याज पर बहुत ध्यान नहीं जाता।

चीन और भारत मिलकर दुनिया के कुल उत्पादन (सात करोड टन) का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा पैदा करते हैं। मगर प्रति व्यक्ति प्याज की खपत के लिहाज से दुनिया में सबसे अधिक प्याज लीबिया में खाई जाती है।

साल 2011 के संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के मुताबिक लीबिया में हर व्यक्ति औसतन 33।6 किलो प्याज सालाना उपयोग करता है। लीबिया के मेरे एक दोस्त ने कहा, "हम लगभग हर चीज में प्याज डालते हैं।"

केली बताती हैं कि पश्चिमी अफ्रीका के कई देशों में 'बहुत ज्यादा प्याज' खाई जाती है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अनुसार प्याज की खपत वाले 10 शीर्ष देशों में यहां का कोई देश नहीं है।

ब्रिटेन में कई लोगों की मान्यता है कि फ्रांस में बहुत प्याज खाई जाती है लेकिन फ्रांस का औसत 5।6 किलो प्रति व्यक्ति ही है। एक ऐसा देश भी है, जहां प्याज खबरों में जगह पाती है और वह देश है भारत। अगर प्याज का दाम बहुत तेजी से बढता है तो समझिए मुसीबत आने वाली है।

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथग्रहण के कुछ दिनों बाद ही घरेलू बाजार में प्याज का दाम बढने के डर से इस बात का इंतजाम किया कि प्याज का निर्यात बहुत कम मूल्य पर न हो।

भारत में चार साल पहले तत्कालीन सरकार ने विरोध प्रदर्शन देखते हुए प्याज निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकॉनमिस्ट प्रांजुल भंडारी कहती हैं, "कोई स्थापित संबंध तो नहीं है लेकिन माना जाता है कि समय-समय पर प्याज का दाम महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा रहा है।"
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1998 से प्याज का चुनावों में असर

प्याज का चुनाव पर सबसे प्रत्यक्ष असर शायद 1998 में दिखा। माना जाता कि उस साल दिल्ली विधानसभा में भाजपा की हार में प्याज की ऊंची कीमतों का हाथ था। भंडारी कहती हैं कि प्याज का राजनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि "प्याज भारतीय घरों का एक अभिन्न अंग है।"

भंडारी कहती हैं, "कुछ व्यंजनो को छोड दें, तो भारत में कोई भी पकवान प्याज के बिना नहीं बन सकता। इसलिए प्याज के दाम में उतार-चढाव का आम आदमी के जीवन में सीधा असर होता है।"

ब्रिटेन में प्याज के दाम घटने-बढने से ज्यादा उथल-पुथल नहीं होती लेकिन प्याज उत्पादक ख्याल रखते हैं कि साल भर प्याज की आपूर्ति होती रहे।

ब्रिटेन में क्रिसमस के दौरान प्याज की मांग थोडी बढ जाती है, लेकिन दीवाली और ईद की दौरान इसकी मांग कुछ ज्यादा बढ जाती है। आपको अंदाजा होगा ही कि दुनिया का सबसे प्रमुख वैश्विक खाद्य पदार्थ, सबसे ज्यादा बहुसांस्कृतिक भी है।
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