यदि कोई छोटे कद का पुरुष या अधिक वजन की (बेडौल) महिला यह कहे कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल कर लिया है तो वे निश्चित ही खुद को धोखा दे रहे हैं। यह दावा है ब्रिटेन के शोधकर्ताओं का जिन्होंने पाया कि कद और सुडौल शरीर की चुनौती का सामना कर रहे पुरुष व महिला न तो अच्छी शिक्षा हासिल कर पाते हैं और न ही उन्हें अच्छे रोजगार के जरिए पैसे कमाने के बेहतर मौके मिल पाते हैं।
शोधकर्ताओं की टीम के मुखिया और इंग्लैंड में ह्यूमन जेनेटिक्स के प्रोफेसर टिमोथी फ्रेलिंग ने कहा कि पुरुषों का नाटा रहना और महिलाओं का बेडौल दिखना उनके जीवन में बुरे प्रभाव छोड़ता है। शोध के मुताबिक नाटे कद के पुरुष सालाना एक लाख चालीस हजार रुपये से भी कम कमा पाते हैं, जबकि उनसे महज तीन इंच लंबे पुरुष इससे अधिक कमाते हैं।
ठीक इसी तरह सामान्य से 14 पाउंड अतिरिक्त वजन वाली महिलाओं की आय भी कम होती है। शोध में इसके लिए सामाजिक पक्षपात को एक बड़ा कारण बताया गया है। इसी के चलते छोटे कद के पुरुषों और बेडौल महिलाओं की न केवल सामाजिक छवि खराब होती है बल्कि ये लोग जीवन भर अवसाद का शिकार भी रहते हैं।
प्रोफेसर फ्रेलिंग ने कहा कि ऐसे पुरुष महिला अक्सर नियोक्ता द्वारा पक्षपात का शिकार होते हैं। यह शोध लंबाई और वजन को लेकर आनुवांशिक जानकारी पर आधारित था। अध्ययन में भाग लेने वालों ने शोधकर्ताओं को अपने जीवन से जुड़ी कई बातें भी बताईं।
इसे देखते हुए सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर पांच हिस्सों में यह अध्ययन किया गया। इनमें पूर्ण कालिक शिक्षा पूरी करने, शैक्षिक स्तर, रोजगार वर्ग, वार्षिक घरेलू आय और नुकसान व्यय के आंकड़ों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि पुरुषों का कद और महिलाओं का बेडौलपन उनकी शिक्षा, रोजगार और आय तीनों को प्रभावित करता है।