यूरो जोन के कर्जदाताओं से नये बेलआउट के बदले ग्रीस ने मितव्ययिता की जिन शर्तों को माना था, अब उन्हीं शर्तों पर संसद में वोटिंग होने वाली है।
यह वोटिंग ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास के लिए अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा हो सकती है। सिप्रास यूरोजोन की तरफ मिलने वाले तीसरे बेलआउट के लिए अपने ही सांसदों को मनाने में लगे हैं।
बेलआउट की शर्तों को ग्रीस के संसद की मंजूरी मिलनी जरूरी है। इसके बाद ही यूरो जोन के 18 देश इस बात पर विचार करेंगे कि बदले में ग्रीस को 86 अरब यूरो का तीसरा बेलआउट मिलना चाहिए या नहीं।
कई सांसद नाखुश
उल्लेखनीय है कि पांच वर्षों के दौरान ग्रीस को मिलने वाला यह
तीसरा बेलआउट होगा। एक तरफ, जहां उम्मीद है कि ग्रीस की संसद में प्रस्ताव
पारित हो जाएगा वहीं सिप्रास के ही कई सांसद इस प्रस्ताव से नाखुश
हैं।
इनमें से 30 तो उनकी अपनी ही पार्टी सिरिजा से हैं। ऐसे में सवाल यह भी
है जब देश के प्रधानमंत्री अपने ही नेताओं को प्रस्ताव के लिए राजी नहीं
कर पा रहे हैं तो जनता को कैसे राजी करेंगे।
हालांकि, उम्मीद की जा रही है
कि यूरोप समर्थक विपक्षी पार्टियों द्वारा यह प्रस्ताव संसद में पारित हो
जाएगा। सिप्रास ने कहा कि यह समझौता उनके लिए एक मजबूरी है और वह उसकी
‘पूरी जिम्मेदारी’ लेते हैं।
ताकि देश को संकट से उबार सकूं
उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी तरह सहमत नहीं हूं
लेकिन मैंने हस्ताक्षर किया ताकि देश को संकट से उबार सकूं।’ एक टीवी चैनल
को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘एक प्रधानमंत्री को संकटों से
निश्चित तौर पर लड़ना चाहिए, सच बताना चाहिए, निर्णय लेना चाहिए, न कि भाग
खड़ा होना चाहिए।’
समझौते में सिप्रास श्रम कानून, पेंशन,
वैट और अन्य करों में भारी बदलाव लाने पर सहमत हुए थे। उल्लेखनीय है कि जब
इन्हीं मसलों पर जनमत संग्रह कराया गया था तक ग्रीस की जनता ने बेलआउट के
बदले इन शर्तों को खारिज कर दिया था।
वैकल्पिक वित्त
मंत्री नाडिया वालावानी ने कहा कि वह इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है और
उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। सिप्रास को भेजे पत्र में उन्होंने
कहा कि वह जर्मनी और उसके समर्थकों के तिकड़मों को समझती हैं और यह ग्रीस
की सरकार और देश के लिए अपमान की बात है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को
वालावानी के इस्तीफे की सूचना आम की।
बेलआउट की योजना
एक यूरोपीय अधिकारी के अनुसार, बेलआउट की नई योजना के तहत यूरो जोन की सरकारें ग्रीस को तीन साल के लिए 40 और 50 अरब डॉलर देंगी जबकि शेष का योगदान आईएमएफ करेगा। पैसे जुटाने के लिए ग्रीस की सरकारी संपत्तियों के अलावा वित्तीय बाजारों की हिस्सेदारी भी बेची जाएगी।
आईएमएफ की सख्त चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने सख्त चेतावनी दी है कि कर्ज में राहत के अलावा 2018 तक नई फाइनेंसिंग के जरिए ग्रीस को 85 अरब यूरो की जरूरत होगी। आईएमएफ का कहना है कि 29 जून को बैंकों के बंद होने के बाद से ग्रीस की आर्थिक स्थिति और बिगड़ी है।
यूरो जोन की सरकारें जितना आंक रही हैं, वास्तव में, ग्रीस की आर्थिक स्थिति उससे कहीं ज्यादा खराब है। इससे पहले आईएमएफ ने कहा था कि ग्रीस को 2018 तक के लिए 60 अरब यूरो की जरूरत होगी।