वक्त की पाबंदी क्या होती है यह जापान के लोगों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। यहां एक-एक सेकेंड की कीमत होती है। काम के समय यहां सिर्फ काम ही होता है और अगर कोई इस नियम को नहीं मानता है या काम के दौरान कहीं उठ कर चला जाता है तो उसे इसके गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं।
इसका ताजा उदाहरण हाल ही में जापान के कोबे शहर में देखने को मिला है। यहां जल विभाग में काम करने वाले एक कर्मचारी ने तय समय से महज 3 मिनट पहले अपनी सीट छोड़ दी तो विभाग के सभी बॉस ने टीवी पर लाइव आकर जनता के सामने झुककर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारी के ऐसा करने से 3 मिनट बर्बाद हो गए, जिससे देश को नुकसान हुआ।
उन्होंने बताया कि कर्मचारी पर पिछले 7 महीनों से नजर रखी जा रही थी। उसे इन 7 महीनों में 26 बार तय समय से पहले अपनी सीट छोड़ने का दोषी पाया गया। विभाग ने उसे कड़ी चेतावनी दी है और दोबारा ऐसा न करने को कहा है। साथ ही उस कर्मचारी की एक दिन की आधी सैलरी भी विभाग द्वारा जुर्माने के तौर पर काट ली गई है।
दरअसल जापान के वर्क कल्चर के मुताबिक, वहां के सरकारी कर्मचारियों का हर सेकेंड बहुत कीमती होता है। अगर वह समय से पहले काम छोड़ता है तो माना जाता है कि उससे देश का नुकसान होता है। ऐसी स्थिति में जुर्माने के तौर पर कर्मचारी की या तो सैलरी काट ली जाती है या कभी-कभार तो उसे सस्पेंड भी कर दिया जाता है।
इसी साल फरवरी में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जिसमें एक कर्मचारी वर्क ऑवर के दौरान अपनी डेस्क से उठकर लंच करने चला गया था। समय से पहले अपनी डेस्क छोड़ने के लिए उसे एक महीने तक के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि इसके पीछे कर्मचारी के पिछले 6 महीने में करीब 55 घंटे अनुपस्थित रहने का दोषी पाया गया था।
बताते चलें कि पिछले दिनों जापान में वर्क प्रेशर के कारण कई कर्मचारी मानसिक रूप से दबाव में आ गए थे। इस कारण कई कर्मचारियों ने आत्महत्या भी कर ली थी। इसको जापान सरकार ने गंभीरता से लेते हुए पिछले महीने ही एक कानून बनाया, जिसमें कर्मचारियों के 100 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम करने पर रोक लगा दिया गया।