सऊदी अरब के शाह अब्दुल्लाह के निधन पर ब्रिटेन की सरकारी इमारतों पर देश के झंडे झुकाने की आलोचना हो रही है। जिन इमारतों पर झंडे झुकाए गए हैं उनमें ब्रितानी संसद भवन और वेस्टमिंस्टर आबे भी शामिल है।
किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की मौत पर राष्ट्रध्वज का झुकाया जाना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन ब्रिटेन के कई राजनेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अखबारों ने इस बार इसका विरोध किया है।
दुनिया भर के शीर्ष नेता दिवंगत सऊदी शाह अब्दुल्लाह को श्रद्धांजलि देने के लिए सऊदी अरब जा रहे हैं। ब्रिटेन में आलोचकों की दलील है कि कई मामलों में सऊदी अऱब का रिकॉर्ड बहुत खराब है इसलिए ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।
खासतौर पर महिलाओं से भेदभाव, बोलने पर पाबंदी, धार्मिक आजादी पर रोक और कठोर न्यायिक सजाएं- जिनमें कोड़े मारना और फांसी शामिल हैं- की वजह से सऊदी अरब की आलोचना होती है।
कई सांसदों ने झंडा झुकाए जाने को अनैतिक बताते हुए जनता की भावना के विपरीत बताया है। हाल ही में रइफ बादावी नाम के एक ब्लॉगर को सऊदी अरब में धार्मिक बहस छेड़ने के अभियोग में 1,000 कोड़े मारने और 10 साल के क़ैद की सजा हुई है।