आप इसे ‘लाइक’ करें या न करें, लेकिन यह सच है कि फेसबुक आपकी सेहत सुधारने की पूरी क्षमता रखता है। पीट्सबर्ग स्थित कर्नेजी मेलन यूनिवर्सिटी ने पहली बार इस तरह का अधिकृत शोध किया है।
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि किसी शुभेच्छु द्वारा सोशल मीडिया साइट पर निजी संदेश देना या पोस्ट लाइक करना यूजर के व्यवहार व सेहत में सार्थक सुधार लाता है। अध्ययनकर्ता रॉबर्ट क्राउट के मुताबिक फेसबुक मित्रों को चाहिए कि वे अपना कुछ वक्त दोस्तों की पोस्ट पढ़ने, उन्हें लाइक करने व निजी कमेंट करने में अवश्य लगाएं।
करीबी मित्र के एक या दो वाक्य का कमेंट पोस्ट लिखने वाले को दिमागी रूप से सुकून देता है, बदले में वह भी करीबी मित्र की पोस्ट पर सकारात्मक विचार लिखता है। जबकि कोई अन्य मित्र भी यदि पोस्ट पर लाइक करता है या कमेंट देता है तो उसे भी यूजर सकारात्मक रूप से लेता है। यह सारी गतिविधियां धीरे-धीरे आपसी मित्रों के बीच सेहतमंद वातावरण बनाने में मददगार होती हैं।
इससे पहले फेसबुक पर लाइक्स नहीं मिलने से यूजर के तनावग्रस्त रहने संबंधी आलोचना सिर्फ मनोवैज्ञानिक सर्वे पर आधारित थी। जबकि 91 देशों में किया गया यह अध्ययन फेसबुक पर यूजर के स्वास्थ्य में सुधार का सकारात्मक प्रमाण लेकर आया है। यह शोधपत्र हाल ही में ‘कम्प्यूटर कम्युनिकेशन’ नामक एक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध संबंधी फाइंडिंग्स की प्रामाणिकता को यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना ने भी सही पाया है।
इन प्रतिभागियों की मासिक आधार पर सेहत जांच भी की गई
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इस तरह किया गया प्रतिभागियों का अध्ययन
शोध में सभी 91 देशों के 2000 से ज्यादा यूजरों की हर गतिविधियों को लगातार तीन माह तक मॉनीटर किया गया। इन गतिविधियों में फेसबुक पर पोस्टिंग, अध्ययन, कमेंट, क्लिक रिस्पांस और दिमागी मिजाज को शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों की मासिक आधार पर सेहत जांच भी की गई, जिसमें उनका मूड, अवसाद, अकेलापन, मानसिक दबाव, जीवन के प्रति संतुष्टि और सामाजिक समर्थन को भी शामिल किया गया।
पुराने नकारात्मक परिणामों से अलग है यह शोध
फेसबुक को कई बार इसलिए आलोचना झेलना पड़ा है कि यूजर द्वारा इस पर बहुत अधिक समय बिताने से वह मनोरोग का शिकार होने लगता है। यह पुराने सर्वे फेसबुक पर यूजर के समय बिताने और लाइक न मिलने पर केंद्रित थे। जबकि यह शोध बताता है कि फेसबुक पर सक्रिय रहने से मित्रों के बीच आपसी संबंध बेहतर होते हैं और तालमेल बढ़ता है। इसका प्रभाव उन्हें अवसाद से बाहर लाता है और सेहतमंद बनाता है।