जानें एलिस डोररिंग्टन के बीमार पिता कहानी की कहानी आखिर क्यों हर साल वो अपने पिता के सम्मान में रख लेती है मूछ।
एलिस डोररिंग्टन मेरे पिता ने कीमोथेरेपी के सहारे एक ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी। मैं अपने पिता के साथ इस बीमारी से पीड़ित लोगों के सहायता के लिए धन जुटाने का अभियान चलाते थे, लोगो में जागरुकता फैलाते थे। उनकी याद में मैं पूरे गर्व के साथ में खुद को दुनिया की दाढ़ी वाली महिला घोषित करती हूं।
मेरे पिता भी सभी पिताओं की तरह अड़ियल और शराबी थे। वे एएफसी विंबलडन के समर्थक थे। वह डॉन कोल के छह राष्टों के टूर्नामेट में घायल होने से इतना परेशान हो गए जितना कि परिवार में रह रहे पालतू जानवर के मर जाने पर भी नही हुए। अपनी परेशानियों को साझा करने के लिए उनका कोई बेटा नही था। पर वह अपनी सारी परेशानी मुझसे सांझा करते थे। जब मुझे मेरे पिता के टर्मिनल प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित होने का पता तो मुझे इस बात का ज्यादा अफसोस नही हुआ यह दर्द भी में आसानी से सह गई।
पिताजी ने वीरतापूर्वक परीक्षणों और कीमोथेरेपी के क्लेश के माध्यम से लड़ाई लड़ी है, इस प्रक्रिया में उनकी बाल विकसित करने की क्षमता चली गई, तभी से मैं हर सुबह गर्व से एक मूंछ पहन कर उनके जागरुकता अभियान के लिए पैसा इकट्ठा करने निकल जाती यही से मेरा दान के प्रति प्यार बढ़ा।
इस मुवबर नामक बीमारी ने मुझे मेरे गुस्से को नियंत्रित करने में सहायता की। मैं जानता थी की इस लड़ाई में परमात्मा मेरे साथ है। वो मेरे पिता को इस बीमारी से छुटकारा दिलाएगें, मैं यह भी जानती थी। वो लड़ रहे थे, और इनके साथ मैं भी। मैं अपने हीरो को नही खोना चाहती थी।
वह बहुत बुरा दिन था जब मैंने उपने पिता को खोया। मैंने उस दिन मेरे बहुत अच्छे दोस्त, कॉमरेड, मेरी ताकत, को खो दिया था। लेकिन क्या आप जानते हो कि अगर मोवर इस सफल चिकित्सा अनुसंधान के लिए पैसे नही दिए होते तो में अपने पिता को कब का खो चुकी होती।