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ये लड़की हर वर्ष पिता की याद में गर्व से रख लेती है मूछें, पढ़िए पूरी कहानी

Thu, 02 Jun 2016 08:38 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,दिल्ली
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Moustache lady - फोटो : the Guardian
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जानें एलिस डोररिंग्टन के बीमार  पिता कहानी  की कहानी आखिर क्यों  हर साल वो अपने पिता के सम्मान में रख लेती है मूछ।
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एलिस डोररिंग्टन मेरे पिता ने कीमोथेरेपी के सहारे एक ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी। मैं अपने पिता के साथ इस बीमारी से पीड़ित लोगों के सहायता के लिए धन जुटाने का अभियान चलाते थे, लोगो में जागरुकता फैलाते थे। उनकी याद में मैं पूरे गर्व के साथ में खुद को दुनिया की दाढ़ी वाली महिला घोषित करती हूं।

मेरे पिता भी सभी पिताओं की तरह अड़ियल और शराबी थे। वे एएफसी विंबलडन के समर्थक थे। वह डॉन कोल के छह राष्टों के टूर्नामेट में घायल होने से इतना परेशान हो गए जितना कि परिवार में रह रहे पालतू जानवर के मर जाने पर भी नही हुए। अपनी परेशानियों को साझा करने के लिए उनका कोई बेटा नही था। पर वह अपनी सारी परेशानी मुझसे सांझा करते थे। जब मुझे मेरे पिता के टर्मिनल प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित होने का पता तो मुझे इस बात का ज्यादा अफसोस नही हुआ यह दर्द भी में आसानी से सह गई।
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पिताजी ने वीरतापूर्वक परीक्षणों और कीमोथेरेपी के क्लेश के माध्यम से लड़ाई लड़ी है, इस प्रक्रिया में उनकी बाल विकसित करने की क्षमता चली गई, तभी से मैं हर सुबह गर्व से एक मूंछ पहन कर उनके जागरुकता अभियान के लिए पैसा इकट्ठा करने निकल जाती यही से मेरा दान के प्रति प्यार बढ़ा।

इस मुवबर नामक बीमारी ने मुझे मेरे गुस्से को नियंत्रित करने में सहायता की। मैं जानता थी की इस लड़ाई में परमात्मा मेरे साथ है। वो मेरे पिता को इस बीमारी से छुटकारा दिलाएगें, मैं यह भी जानती थी। वो लड़ रहे थे, और इनके साथ मैं भी। मैं अपने हीरो को नही खोना चाहती थी।  

वह बहुत बुरा दिन था जब मैंने उपने पिता को खोया। मैंने उस दिन मेरे बहुत अच्छे दोस्त, कॉमरेड, मेरी ताकत, को खो दिया था। लेकिन क्या आप जानते हो कि अगर मोवर इस सफल चिकित्सा अनुसंधान के लिए पैसे नही दिए होते तो में अपने पिता को कब का खो चुकी होती।
 
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मैं लड रहीं थी। यह सुनिश्चित करने को कि दूसरे लोगों का भी मेरे पिता जैसा हाल न हो।

Moustache lady - फोटो : the Guardian
मैं लड़ रहीं थी। यह सुनिश्चित करने को कि दूसरे लोगों का भी मेरे पिता जैसा हाल न हो और अन्य किसी बेटी को अपने पिता को न खोना पड़े।
 
नवबंर 2015 में मैंने सोशल मीड़िया पर एक अभियान चलाया। जिसके तहत मैंने लोगों को बताया कि पुरुष महिलाओं से 10 वर्ष कम जीते है। और तब मैंने अपने एक दोस्त को 5 पौंड़ दान करने को कहा यदि वो और अतिरिक्त जीना चहता है तो । और इस सोशल मीड़िया कैपेन के सहारे अपने सभी दोस्तो से दान करने को कहा।
 
अभियान तुरंत तेजी से शुरु हुआ। और एक सप्ताह के अदंर ही कई लोगों ने हमें हजारो पौंड़ दान किए। एक दिन जब शाम को मैने जैसे ही अपने मोसकोप पर लॉगइन किया तो मेरी वॉल पर इस अभियान से जुड़े कई संदेश थे। और देखते ही देखते यह अभियान पूरे ब्रिटेन मे यह मशहूर हो गया। और पुरुषों के स्वास्थ्य का चेहरा बदलने के लिए, एक नई शुरुआत हुई लेकिन निश्चित रूप से अभी और भी बहुत कुछ होना अभी बाकी है।

मेरी यात्रा अभी शुरु हुई है। अब जाकर मैं अपने पिता की बीमारी और उससे जुड़े खतरे के बारे में जान पाई। और यह भी जान पाई की हर व्यक्ति को इसके बारे मे जानना कितना जरुरी है।
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