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मिस्र: दुनिया भर में हिंसक कार्रवाई की निंदा

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मिस्र की राजधानी क़ाहिरा में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ की जा रही कार्रवाई की दुनिया भर में आलोचना हो रही है।
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अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन कैरी ने कहा है कि ये स्थिति दुखद है और समझौते के प्रयासों के लिए बड़ा झटका है।

यूरोपीय संघ की नीति प्रमुख कैथरीन ऐशटन और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने भी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ बल प्रयोग की कड़ी निंदा की है।

अंतरिम प्रधानमंत्री हाज़ेम बेबलावी ने सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि प्रशासन पर सुरक्षा बहाल करने की ज़िम्मेदारी है

मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थन में क़ाहिरा में जारी विरोध प्रदर्शनों को ख़त्म करने के लिए बुधवार को हुई हिंसक सैन्य कार्रवाई में सैंकड़ों लोग मारे गए हैं, जिनमें पत्रकार भी शामिल हैं। हिंसक कार्रवाई के बाद महीने भर के लिए आपातकाल घोषित कर दिया गया है।

मिस्र के टीवी चैनलों के मुताबिक़ बुधवार शाम तक रबा अल अदविया मस्जिद के पास के इलाक़े को पूरी तरह ख़ाली करा लिया गया। मुस्लिम ब्रदरहुड के कई नेताओं को गिरफ़्तार किया गया जबकि प्रदर्शनकारियों को कैंप से जाने दिया गया। इससे पहले दिन के समय में एक छोटे विरोध कैंप को तितर-बितर कर दिया गया था।
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सैंकड़ों की मौत
मिस्र के स्वास्थय मंत्रालय के मुताबिक़ बुधवार को प्रदर्शनों को तितर-बितर करने के लिए हुई हिंसक कार्रवाई में कम से कम 149 लोग मारे गए हैं और 1403 लोग घायल हुए हैं। लेकिन मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि दो हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है।

हिंसक कार्रवाई के बाद मिस्र की अंतरिम सरकार में उप राष्ट्रपति मोहम्मद अल बारदोई ने इस्तीफ़ा दे दिया है।

सैन्य कार्रवाई के बाद मिस्र में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। क़ाहिरा और कई अन्य बड़े शहरों में रात भर का कर्फ़्यू लगाया दिया गया है। सरकार का कहना है कि स्थिरता और प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसने ये क़दम उठाया है।

क़ाहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ यहां की सड़कों पर ख़ौफ़नाक सन्नाटा पसरा है।

इससे पहले दिन में अलेक्ज़ेड्रिया, सुऐज़, असयुत, फैयोम, असवान और अन्य शहरों में हिंसक झड़पों के दौरान मुर्सी समर्थकों ने सरकारी कार्यालयों, पुलिस स्टेशनों और कई चर्चों पर हमले किए।

मिस्र के आंतरिक मंत्रालय के मुताबिक़ हिंसक झड़पों में 43 पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं जिनमें कई अधिकारी शामिल हैं।

नरसंहार?
प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने हिंसा को सुलह की कोशिशों के लिए गंभीर झटका बताते हुए चेताया कि बुधवार की घटनाओं ने राजनीतिक समाधान को और मुश्किल बना दिया है। उन्होंने आपातकाल को जल्द से जल्द समाप्त करने का आह्वान किया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने मिस्र की सरकार द्वारा वार्ता की जगह हिंसा का इस्तेमाल करने पर खेद व्यक्त किया। तुर्की ने क़ाहिरा में हुई हिंसा को नरसंहार बताया है जबकि ईरान का कहना है कि मिस्र में गृह युद्ध की संभावना बढ़ गई है।

यूरोपीय देशों की सरकारों ने भी हिंसा पर चिंता ज़ाहिर की है। फ्रांस ने हिंसा पर अफ़सोस प्रकट किया जबकि जर्मनी ने चिंता ज़ाहिर करते हुए हिंसा को ख़तरनाक क़दम बताया।

कार्रवाई का बचाव
मिस्र के अंतरिम प्रधानमंत्री हाज़ेम बेबलावी ने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाया गया। बेबलावी ने कहा कि अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों को तितर-बितर करने का फ़ैसला आसान नहीं था।
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हिंसक कार्रवाई में लोगों की मौत पर दुख ज़ाहिर करते हुए बेबलावी ने कहा कि आपातकाल को जल्द से जल्द हटा लिया जाएगा।

वहीं आंतरिक मामलों के मंत्री मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि पुलिस ने बेहद पेशेवर तरीक़े से कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हटाया।

उन्होंने कार्रवाई के लिए पुलिस की तारीफ़ की और मुर्सी समर्थकों पर किलेबंदी करने और गोलीबारी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि हथियारबंद लोग प्रदर्शनकारियों के बीच घुस आए थे और भारी तादाद में गोला बारूद ज़ब्त किया गया है।
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