मिस्र के पूर्व सैन्य प्रमुख अब्दुल फतह अल-सीसी ने राष्ट्रपति चुनावों में भारी जीत हासिल की है। सरकारी मीडिया ने कहा है कि अंतरिम परिणामों में अधिकांश मतदान केंद्रों पर हुई मतगणना में अल सीसी को कुल मतों के 93 प्रतिशत मत मिले हैं।
चुनावों के मद्देनजर अधिक से अधिक लोगों को मतदान केंद्रों तक लाने के अभियान के बावजूद लगभग 46 प्रतिशत ही मतदान हो पाया था।
मिस्र के अधिकांश राजनीतिक गुटों ने इस चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की थी। अल सीसी ने बीते साल जुलाई में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी को पद से हटा दिया था।
उन्होंने मोरसी के मुस्लिम ब्रदरहुड के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की थी, जिसमें लगभग 1400 लोग मारे गए और 16,000 लोग हिरासत में हैं।
मुस्लिम ब्रदरहुड का दावा
लोकतंत्र के पक्ष में अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता नागी कमेल ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि यह वास्तविक चुनाव है।'' मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा था कि अधिकांश उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष समूहों की तरह वो भी मतदान का बहिष्कार करेगा।
अल सीसी के सामने हमदीन सबाही राष्ट्रपति पद के एकमात्र उम्मीदवार थे। हमदीन सबाही ने कुछ समय पहले कहा था कि उनकी टीम ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई 'अनियमतताओं' को रिकॉर्ड किया है।
हालांकि हमदीन ने अपने समर्थकों के चुनाव बहिष्कार की अपील को ख़ारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यह मिस्र की जनता के हित में नहीं है।
सरकारी नियंत्रण वाले अल अहराम अख़बार के अनुसार, सबाही को 2 करोड़ 47 लाख मतों में से करीब 760,000 ही मत मिले। जैसे ही मतगणना में अल सीसी को बढ़त मिलने की ख़बर आई, गुरुवार की सुबह ही उनके समर्थक जश्न मनाने के लिए काहिरा की सड़कों पर उतर पड़े।
अल-सीसी के सामने चुनौती
सेना समर्थित प्रशासन ने और अधिक लोगों के मतदान करने की उम्मीद में मतदान के समय को तीसरे दिन तक बढ़ा दिया था। लेकिन ख़बरों के मुताबिक अधिकांश मतदान केंद्रों पर बुधवार को सन्नाटा छा गया था।
राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि मतदान में बहुत कम भागीदारी पद ग्रहण करने से पहले ही अल सीसी के प्राधिकार को कमजोर करता है।
उनका लक्ष्य था पांच करोड़ 40 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से चार करोड़ मतदाताओं का समर्थन हासिल करना ताकि दिखाया जा सके कि मिस्र की आबादी का बहुमत उनके साथ है।
लेकिन इन चुनावों में करीब दो करोड़ 50 लाख मतदाताओं ने हिस्सा लिया। मोहम्मद मोरसी और पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक के बीच पिछले राष्ट्रपति चुनावों में 52 प्रतिशत मतदान हुआ था।