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सहारा रेगिस्तान मे पानी की किल्लत से 44 लोगों की मौत, 6 की बची जान

Fri, 02 Jun 2017 11:42 AM IST
amarujala.com- Submitted by: मुकेश झा
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रेडक्रॉस ने बीबीसी को बताया है कि उत्तरी निजेर के सहारा रेगिस्तान वाले इलाके में एक गाड़ी के खराब हो जाने से 44 लोगों की मौत हो गई है। रेड क्रॉस के लावल ताहेर के अनुसार गाड़ी में सफर करने वाले 44 लोगों की मौत प्यास के मारे हुई, जबकि 6 लोगों ने निजेर के दिरकू गांव पहुंच कर अपनी जान बचाई। बचने वालों में सभी महिलाएं हैं। उनका कहना है कि मारे जाने वालों में कई बच्चे भी शामिल हैं।
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नाइजीरिया के ऑनलाइन अखबार साहेलीन के अनुसार घाना और नाइजीरिया से ये लोग लीबिया जा रहे थे। ताहेर के अनुसार अब तक शवों की पहचान के लिए अब तक कोई भी वहां नहीं पहुंच पाया है।

सफर जो बन सकता है मौत की राह

उत्तरी अफ्रीका पहुंचने के लिए निजेर से प्रवासी अधिकतर इसी रास्ते लीबिया जाते हैं। वहां से आगे वो यूरोप जाने के लिए भूमध्य सागर पार करते हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार प्रवासियों के लिए सहारा का ये रास्ता सबसे कठिन होता है। इसे पार करने के लिए वो ट्रकों में भरभर कर जाते हैं और इस दौरान कुछ ही लीटर पानी पर निर्भर करते हैं।
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अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि सहारा जैसे एक विशाल इलाके में कितने लोग मारे गए हैं इसकी पुष्टि करना लगभग असंभव है। बीते साल जून में अल्जीरिया से सटे निजेर की सीमा के पास 34 प्रवासियों के शव पाए गए थे जिनमें 20 बच्चे थे। सरकार में एक मंत्री ने उस वक्त कहा था कि लगता है कि मानव तस्करी करने वालों ने उन्हें वहं छोड़े दिया था जिसके बाद प्यास से उनकी मौत हो गई।
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हर साल सहारा में कितने लोग मरते हैं ये कह पाना मुश्किल है

नाइजीरिया से बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंस का कहना है कि सहारा से होकर गुजरने वाले रास्ते में गाड़ी खराब हो जाना सफर करने वालों के लिए मौत की घंटी है।

मार्टिन के अनुसार "बेहतर ज़िदगी की तलाश में यूरोप का रुख करने वालों के लिए आगे जाने के लिए निजेर एक अहम जगह है। हर साल हजारों लोग इस रास्ते लीबिया पहुंचते हैं और नाव के जरिए यूरोप जाते हैं।"

वो कहते हैं "हर साल सहारा में कितने लोग मरते हैं ये कह पाना मुश्किल है क्योंकि ये विशाल इलाका सरकारी निगरानी से परे है। कई प्रवासी प्यास से मर जाते हैं जबकि कईयों को अपराधी या सुरक्षाबल हमला कर लूट लेते हैं।"
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