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नीदरलैंड्स का डॉक्टर जो धोखे से देता था अपने शुक्राणु

Tue, 30 May 2017 05:54 PM IST
amarujala.com-Presented by- आनंद
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"जब मैं युवा था तब एक डॉक्टर की तस्वीर देखकर मैं कांप गया।" 30 साल के नीदरलैंड्स निवासी जोए हूडमैन ने अप्रैल में एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा, "मेरा दिमाग चकरा गया था... स्तब्ध था और तकरीबन चक्कर खाकर गिर ही गया था।" दरअसल, हूडमैन ने जो तस्वीर देखी थी वो जेन कारबाट की थी।
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कारबाट एक डॉक्टर थे, जिनकी कुछ हफ्ते पहले मौत हो गई थी और उन पर गर्भाधान उपचार के दौरान अपने ही शुक्राणु यानी स्पर्म देने का आरोप है। अब तक 18 लोगों ने डीएनए टेस्ट कराया है और इन टेस्ट के नतीजे उस डॉक्टर की एक संतान के डीएनए से मेल खा गए हैं।

डॉक्टर पर मुकदमा


कारबाट रोटरडम स्थित एक फ़र्टिलिटी ट्रीटमेंट क्लीनिक के प्रमुख थे 1980 से 2009 के दौरान इस पद पर रहते हुए हजारों महिलाएं उपचार के सिलसिले में उनसे मिलीं। इससे पहले भी 1970 के दशक में वो जिस अस्पताल से जुडे थे वहाँ पर भी उनपर अपने शुक्राणुओं को बदलने का संदेह है। 25 लोगों ने मुकदमा दायर कर ये स्पष्ट करने को कहा है कि क्या कारबाट ने उपचार अपने शुक्राणुओं से किया न कि दानदाताओं के शुक्राणुओं से।
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जुरिड अस्पताल प्रशासन ने भी रविवार को इस बात की पुष्टि की है कि इस मामले में जाँच शुरू कर दी गई है। कारबाट का 89 साल की उम्र में इसी साल अप्रैल में निधन हो गया था। मुश्किल ये है कि कारबाट ने अपनी वसीयत में लिखा है कि उनका डीएनए नमूना न लिया जाए।
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डॉक्टर ने कबूला था?

डॉक्टर कारबाट से चेहरा-मोहरा और कद-काठी मिलने के बावजूद हूडमैन ने टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि वो पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि डॉक्टर कारबाट उनके पिता हैं। हूडमैन ने कहा, "हो भी सकता है। हमें डीएनए जाँच के नतीजे का इंतजार करना होगा। ये बहुत अहम है इसलिए ये मामला कोर्ट में है।" हूडमैन की तरह 36 साल के मोनिएक वासेनार को किसी तरह का शक नहीं है। वासेनर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि डॉक्टर ने खुद इस बात को कबूला है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक वासेनार जब 2011 में डॉक्टर से मिली थी तो उन्होंने वासेनार से अपना हाथ दिखाने कहा और कहा, "हो सकता है कि वो उनकी बेटियों में से एक हो।" इस महिला ने दावा किया कि डॉक्टर ने इस बात को माना था कि वो मरीज द्वारा चुने गए डोनर के शुक्राणुओं के बजाय अपने शुक्राणुओं का उपयोग करते थे। वासेनार के मुताबिक डॉक्टर ने कहा कि "वो मानवीयता के लिए अपने शुक्राणुओं का दान कर रहे थे और इस दुनिया में उनके कम से कम 60 बच्चे हैं।" महिला ने कहा कि ये सब कुछ सत्तर से दशक में हुआ और डॉक्टर का कहना था कि महिलाएं ज्यादा पढ़े-लिखे व्यक्ति का वीर्य चाहती थी। हालाँकि डीएनए जाँच के लिए कहने पर डॉक्टर ने इससे इनकार कर दिया।

दूसरे क्लीनिकों को भी सप्लाई


कारबाट ने लीडन यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद 1973 में बिड्रॉप डोनेशन क्लीनिक में नौकरी शुरू की। उन्होंने वहाँ अपने शुक्राणुओं को दान किया और हर साल साल बड़ी संख्या में दूसरे डोनर्स भी वहाँ आए। यहाँ से नीदरलैंड्स के दूसरे क्लीनिक को भी शुक्राणुओं की सप्लाई की जाती थी। अनियमितताओं की शिकायत के बाद नीदरलैंड्स के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2009 में इस क्लीनिक को बंद करने के आदेश दिए। ये मामला अब कोर्ट में है और जज 2 जून को इस मामले में फैसला लेंगे।
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