मालदीव जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र में बढ़ते जलस्तर से अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। लेकिन हाल के दिनों में इस देश की चर्चा जारी सियासी टकराव के लिए है। मालदीव में भारत की भूमिका दशकों से स्पष्ट रही है।
भारत से मालदीव का सांस्कृतिक संबंध भी रहा है। यह शुरू होता है मालदीव नाम से ही। ऐसा कहा जाता है कि मालदीव में 'माल' शब्द मलयालम की माला से आया है। मालदीव में 'माल' का मतलब माला से है और दीव का मतलब द्वीप से है।
श्रीलंका के प्राचीन लेखन महावंशा में 'महिलादिवा' लिखा गया है। इसका मतलब 'महिलाद्वीप' बताया जाता है। महावंशा पाली भाषा में है और कहा जाता है कि पाली भाषा के महिला शब्द का संस्कृत में अनुवाद गलती से माला कर दिया गया।
मालदीव नाम का मतलब द्वीपों की माला से है। मतलब वैसा देश जो कई द्वीपों का समूह है। मालदीव की उत्पति संस्कृत के शब्द मालाद्वीप से है।
हिंद महासागर में श्रीलंका के पास मूंगे से बने 1200 ख़ूबसूरत द्वीपों से बना है छोटा सा देश- मालदीव। नीले समंदर से घिरे सफेद रेत के किनारों वाले द्वीप पूरी दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर खींचते रहे हैं।
मालदीव 1200 द्वीपों का एक समूह है जो भारत के सुदूर दक्षिणी किनारे से 700 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में है। 1965 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद शुरू में यहां राजशाही रही और नवंबर 1968 में इसे गणतंत्र घोषित कर दिया गया।
इब्राहिम नासिर देश के पहले राष्ट्रपति बने थे। 1972 में अहमद जकी को प्रधानमंत्री चुना गया था लेकिन 1975 में तख्तापलट हुआ और उन्हें एक द्वीप पर भेज दिया गया। बाद में देश की आर्थिक हालत खराब हुई तो राष्ट्रपति नासिर 1978 में सरकारी खजाने के लाखों डॉलर्स के साथ सिंगापुर चले गए।