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इन देशों ने नहीं लिया लॉकडाउन का सहारा, समझिए कैसे जिंदगी जीती और कोरोना हारा

Sat, 02 May 2020 01:11 PM IST
अंशुल तलमले वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना के दौरान दक्षिण कोरिया - फोटो : ट्विटर
भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने शुक्रवार को लॉकडाउन 3.0 का एलान कर दिया। यानी 3 मई को खत्म हो रहे लॉकडाउन को 14 दिन के लिए 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। यह देशबंदी का चौथा पड़ाव है। 22 मार्च को पीएम मोदी ने एक दिन के जनता कर्फ्यू का एलान किया। 25 मार्च से 14 अप्रैल तक पहली बार 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की गई। 15 अप्रैल से अगले 19 दिन के लिए लॉकडाउन का दूसरा चरण 3 मई को खत्म होता, उसके पहले ही 1 मई यानी शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने देश को अगले 14 दिन की और घरबंदी के आदेश दे दिए।

दुनिया भर के देशों को कोरोना संक्रमण रोकने का जो रास्ता सबसे बेहतर दिख रहा है वह लॉकडाउन ही है। वैसे तो इसने जिंदगी और अर्थव्यवस्था का पहिया रोक दिया। मगर लोगों की जान बचाने में यह लॉकडाउन कारगर भी साबित हुआ। भारत के अलावा चीन, स्पेन और इटली जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था ने लॉकडाउन को अपनाया। मगर इस बीच कुछ ऐसे देश भी हैं, जिन्होंने कोरोना के खिलाफ जंग में इस प्रयोग को सिरे से नकार दिया।
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स्वीडन - फोटो : ट्विटर
स्वीडन: एक तरफ जहां दुनिया की एक चौथाई आबादी घरों में बंद है तो दूसरी ओर स्वीडन जैसे देश भी है, जहां निश्चित नियमों के साथ लोग आजादी से सड़क, पार्क यहां तक की रेस्त्रां में भी जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि एक करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले इस यूरोपिय देश में कोरोना नहीं पहुंच पाया। 21 हजार से ज्यादा मामलों के साथ तकरीबन 2500 लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा। बावजूद इसके स्कूल, व्यापार सबकुछ खुला है। हालांकि सरकार लोगों से घर पर रहने और जरूरत के मुताबिक ही बाहर निकलने को कह रही है। वरिष्ठ नागरिकों का विशेष ख्याल रखने को कहा जा रहा है क्योंकि यहां कोरोना की वजह से मरने वालों में अधिकतर उम्रदराज लोग हैं।
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- फोटो : PTI
दक्षिण कोरिया: जिन देशों में कोरोना वायरस ने अपने शुरुआती दिनों में जमकर तबाही मचाई थी, दक्षिण कोरिया उनमें से एक है, लेकिन फिर बाद में यहां संक्रमण पर जबरदस्त नियंत्रण किया गया। एक वक्त चीन के बाद सबसे ज्यादा मामले दक्षिण कोरिया में ही सामने आए थे। मगर बिना लॉकडाउन के हालातों को संभालना वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं। इस देश ने आक्रामक रणनीति अपनाई। पूरे राष्ट्र का टेस्ट लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। बड़ी मात्रा में लोग आइसोलेट किए गए। 10 हजार पॉजिटिव मामलों में 247 मौत देखने के बाद अब पिछले 10 हफ्ते से यहां कोरोना का कोई नया केस सामने नहीं आया है।

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तुर्कमेनिस्तान - फोटो : Social media
तुर्कमेनिस्तान: इस देश में कोरोना का संक्रमण न के बराबर है। उत्तर कोरिया से सटा हुआ यह देश पूरी दुनिया से कटा हटा है। शायद एक कारण यह भी है कि जब समूचा विश्व कोविड-19 का प्रकोप झेल रहा है। कई देश लॉकडाउन हो चुके हैं तब भी यहां के लोगों की रोजमर्रा जिंदगी बिलकुल सामान्य चल रही है। यहां के कैफे और रेस्त्रां खुले हैं और शादियों में काफी भीड़ जुट रही है। यहां के लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं। दरअसल, यहां शुरुआत में ही यात्राओं पर रोक लगाने जैसे उपायों की वजह से संक्रमित मरीज नहीं मिले। इसके अलावा फरवरी में ही इस देश ने चीन और दूसरे देशों के हवाई सफर पर रोक दी थी। सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को राजधानी की जगह तुर्कमेनाबाद  डायवर्ट कर दिया गया था, जहां एक क्वारंटीन जोन भी बनाया गया था।
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- फोटो : ट्विटर
तजाकिस्तान: तजाकिस्तान में गुरुवार यानी 30 अप्रैल को कोविड-19 के संक्रमण का पहला मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार, यहां अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 15 मामले सामने आ चुके हैं। पांच मामले दुषान्बे में और 10 सुघ्ड में मिले हैं। हालांकि यहां लॉकडाउन नहीं लागू किया गया है, लेकिन चीन से सटे होने के कारण काफी एहतियात बरता जा रहा है। 25 अप्रैल को यहां के स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया था।
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