चांद को विस्तार से देखने-परखने के उद्देश्य से चीन ने अपना पहला रोवर मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम का यह अगला अहम चरण है।
चांग ई-3 मिशन के ज़रिए चीन चांद की सतह पर मौजूद खनिज और धातुओं का पता लगाना चाहता है।
चांग ई-3 मिशन को देश के दक्षिणी इलाक़े ज़ीचांग से छोड़ा गया। यह मिशन ज़ीचांग सेटेलाइट लॉन्च सेंटर से चीन में विकसित लॉन्ग मार्च 3बी रॉकेट के ज़रिए लॉन्च किया गया।
लॉन्ग मार्च रॉकेट के पेलोड (रोवर को ले जाने वाला वाहन) में लैंडिंग मॉड्यूल और छह पहियों वाला रोबोटिक रोवर जुड़ा है जिसे नाम दिया गया है यूतू यानी जेड रैबिट।
इस मिशन को चांद के उत्तरी गोलार्ध में मध्य दिसंबर में उतरना है।
तीसरा रोवर मिशन
सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने ट्विटर जैसी चीन की स्थानीय वेबसाइट सीना वीबो पर अपने आधिकारिक पेज पर कहा, ''न्यूज़ चैनल आज रात मध्यरात्रि से लाइव कवरेज शुरू करेंगे। इसे चारों तरफ़ फैला दें।''
हालांकि चांद की सतह पर उतरने वाला यह तीसरा रोवर मिशन होगा, मगर चीनी सेटेलाइट के ज़रिए काफ़ी परिष्कृत पेलोड भेजा गया है जिसमें सतह के भीतर का पता लगाने वाला रडार भी है जो चांद की मिट्टी और उसकी ऊपरी सतह के आंकड़े इकट्ठे करेगा।
इससे पहले अमरीका और पूर्व सोवियत संघ इस तरह के मिशन भेज चुका है।
शंघाई एयरोस्पेस सिस्टम्स इंजीनियरिंग रिचर्स इंस्टीट्यूट में मौजूद रोवर के डिज़ायनर के मुताबिक़ 120 किलो का जेड रैबिट रोवर 30 डिग्री तक की चढ़ाई पर चढ़ सकता है और एक घंटे में 200 मीटर दूरी तय कर सकता है।
इसका नाम 34 लाख लोगों के बीच हुई एक ऑनलाइन वोटिंग के ज़रिए चुना गया। यह नाम एक प्राचीन चीनी मिथ से जुड़ा है, जिसके मुताबिक़ चांद की देवी चांगई का पालतू ख़रगोश उनके साथ चांद पर रहा करता था।
'बे ऑफ़ रेनबोज़'
पिछले हफ़्ते प्रोफ़ेसर ऊयांग ज़ियुआन ने बीबीसी के साइंस एडिटर डेविड शुकमैन को बताया था कि मिशन अहम तकनीक की पड़ताल करेगा।
उनके मुताबिक़, ''प्रतिभा के पैमाने पर चीन को अपनी ख़ुद की प्रतिभाशाली लोगों की टीम चाहिए जो पूरे चाँद और सौरमंडल की खोजबीन कर सकें- यह हमारा मुख्य उद्देश्य है।''
चाँद की सतह पर उतरने वाले रोवर का लक्ष्य सायनस इरीडियम यानी बे ऑफ़ रेनबोज़ पहुंचना है, जो ज्वालामुखी का पठार है और जिसे अपेक्षाकृत बड़ी चट्टानों से मुक्त माना जाता है। चांद का यह इलाक़ा मेयर इंब्रियम नाम की बड़ी रचना का एक हिस्सा है जो ‘मैन इन द मून’ की दांई आंख जैसा लगता है।
मिशन की दूसरी जानकारियां अधूरी ही हैं; रोवर और लैंडर में सोलर पैनल लगे हैं मगर कुछ सूत्र बताते हैं कि उनमें प्लूटोनियम-238 के रेडियोआइसोटोप हीटिंग यूनिट भी लगे हैं ताकि उन्हें चांद की सर्द रातों में गर्म रखा जा सके।
अमरीकी अपोलो एस्ट्रोनॉट यूजीन सरनान और ‘बज़’ एल्ड्रिन ने भी अपने एक ताज़ा लेख में इशारा किया था कि लैंडिग मॉड्यूल ज़रूरत से कुछ ज़्यादा बड़ा है। इससे लगता है कि यह मानव के उतरने के लिए अगुआ तकनीक साबित हो सकती है।
मिशन के प्रवक्ता पी झाओयू ने सरकारी शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी को बताया कि लॉन्च के लिए आने वाले दिनों में कुछ बेहद ‘संकरी विंडो’ ही उपलब्ध थीं, जिनमें से कुछ केवल कुछ मिनटों की थीं।
स्थाई स्पेस स्टेशन की योजना
अगर मिशन चांद की सतह की पड़ताल के अलावा प्राकृतिक स्रोतों जैसे- दुर्लभ धातुओं का पता लगाने में कामयाब रहा तो यह चीन की लंबी अवधि के अंतरिक्ष कार्यक्रम में मील का पत्थर साबित होगा, जिसमें पृथ्वी की कक्षा में एक स्थाई अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करना शामिल है।
शिन्हुआ ने स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री फ़ॉर नेशनल डिफ़ेंस के प्रवक्ता वू झिजियान के हवाले से कहा है कि चांग ई-3 ''अंतरिक्ष अन्वेषण का अभी तक का सबसे जटिल और मुश्किल कार्य है'' और इसमें कई नई तकनीकें शामिल की गई हैं।
मगर एक अनाम अमरीकी वैज्ञानिक ने हाल में एक पत्रिका एयरोस्पेस अमेरिका को बताया था, ''रोवर पर लगे ज़मीन के भीतर का पता लगाने वाले रडार को छोड़कर लैंडर या रोवर पर मौजूद दूसरे किसी भी यंत्र से चांद पर कुछ नया खोजने की उम्मीद कम ही है।''
यह लॉन्च ऐसे वक़्त हो रहा है जब एशियाई महाशक्ति ख़ुद को दूसरे कई क्षेत्रों में दृढ़ता के साथ आगे बढ़ा रही है, जिसमें पूर्वी चीन सागर पर एयरस्पेस का नियंत्रण भी शामिल है।
चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को अपने बढ़ते दुनियावी क़द और तकनीकी प्रगति का प्रतीक मानता है। इसी के साथ इसे एक समय भूख से जूझते देश के भाग्य को पलटने वाली कम्युनिस्ट पार्टी की कामयाबी की तरह भी देखा जाता है।
इंसान को उतारने की योजना
चीन की तरफ़ से भविष्य के चंद्र अभियानों में चांद की मिट्टी को धरती तक लाना भी शामिल है। मगर अधिकारियों ने चांद पर मानव को भेजने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी घोषित किया है जो 1960 और 1970 के दशकों के अमरीकी अपोलो प्रोग्राम के बाद चांद पर पहले मानव मिशन हो सकते हैं।
चीनी अकादमी ऑफ़ साइंसेज़ के प्रोफ़ेसर ऊयांग ने चांद के वातावरण और प्राकृतिक संपदा के दोहन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि बेहद बारीक वायुमंडल के साथ सोलर पैनल ज़्यादा बेहतर काम कर सकते हैं और उनकी एक 'बेल्ट' ''पूरी दुनिया की मदद कर सकती है।''
उन्होंने यह भी इशारा किया कि चांद पर संभावित धातुओं और खनिजों का खनन भी करना मुमकिन है। ''चांद प्राकृतिक संपदा से भरा है- ख़ासकर दुर्लभ तत्व जैसे टायटेनियम और यूरेनियम से, जो धरती पर बेहद कम हैं और इन्हें असीमित ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।''