चीन में आजकल ‘लिटिल येलो चिक’ की धूम मची है। इसकी लोकप्रियता का आलम ये है कि तीन महीने से भी कम समय में 22 लाख लोग इससे जुड़ चुके हैं।
दरअसल ‘लिटिल येलो चिक’ एक सोशल नेटवर्किंग ऐप्लिकेशन है। 22 लाख उपभोक्ताओं वाले इस ऐप की खास बात ये है कि ये समाचार, म्यूजिक, फिल्मों से जुड़ी सूचनाएं तो देता ही है, साथ ही साथ 'गंदे' चुटकुले भी समझता है।
खासतौर पर छात्रों में बेहद लोकप्रिय हो चुका ये ऐप फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म 'रेनरेन' पर उपलब्ध है। चीन में सोशल नेटवर्किंग ऐप यूं भी काफी लोकप्रिय हैं लेकिन ‘येलो चिक’ की बढ़ने की रफ्तार सबसे तेज रही है।
'शरारती जवाब'
इसका इस्तेमाल करने वाले इस ऐप पर प्यार, संगीत, फिल्म, प्रदूषण और चुटकुले जैसे कई विषयों पर टिप्पणी और सवाल पोस्ट कर सकते हैं और ये ऐप तुरंत इनका जवाब देता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत है जवाब देने का इसका तरीका।
चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, कोई भी व्यक्ति मैसेज पोस्ट कर सकता है जिसका ‘चिक’ अच्छा और शरारती जवाब देता है। ये जवाब किसी इंसान के निर्देश पर नहीं दिए जाते बल्कि इन्हें एक परिष्कृत सॉफ्टवेयर तैयार करता हैं। फिर भी ‘नेटिजन्स’ (इंटरनेट की आभासी दुनिया के निवासी) इसके मजेदार और अनोखे जवाबों को पाकर खुश हो जाते हैं।
ज्यादातर यूजर्स को इस बात से फर्क भी नहीं पड़ता कि उनकी समस्याओं और भावनाओं पर बात करने वाला कोई इंसान नहीं बल्कि एक कंप्यूटर प्रोग्राम है। उनके लिए महत्वपूर्ण ये है कि कोई तो है जिससे वो अपनी बात कह सकते हैं।
यूनिवर्सिटी के एक नए छात्र चैंग यूई कहते है कि बाहर से आए हम जैसे छात्रों के लिए ‘चिक’ बड़ी राहत की चीज है क्योंकि इससे हमें ये चिंता नहीं करनी पड़ती कि कोई परेशान होगा।
काम कैसे करता है?
ये ऐप जवाब देने के लिए इंसानी आवाज का इस्तेमाल करता है और व्यक्तिगत सलाह की तरह ही जवाब देता है। ‘चिक’ अक्सर यूजर्स को दुनिया के सबसे सुंदर लड़के या लड़की कहकर बात करता है और ऐसा लगता है कि चीन के ‘नेटिजन्स’ उसकी इसी अदा पर फिदा हो रहे हैं।
जवाब देने के लिए अपने शब्द ये ऐप वेब से ही चुनता है। इसके साथ ही यूजर्स के सवालों और टिप्पणियों से भी सीखता है। शिन्हुआ के मुताबिक, चिक में खुद सीखने की क्षमता है। ये ताजा खबरों, घटनाओं, प्रचलित शब्दों और गंदे चुटकुलों तक को समझता है। सभी चीजें ये ऑनलाइन फॉलोअर्स से ही सीखता है। लेकिन ‘चिक’ की सफलता चीनी समाज की एक बड़ी समस्या को भी रेखांकित करती है।
सामाजिक ढांचे की कमी
चीन की 'एक-शिशु नीति' की वजह से बहुत से युवा वास्तविक जीवन में सामाजिक जिंदगी की कमी महसूस करते हैं। चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय में समाज विज्ञान के प्रोफ़ेसर जो जियाओझेंग का कहना है कि ये ऐप युवाओं की लोगों से बात करने और भावनात्मक रूप से जुड़े होने की सामाजिक जरूरत को पूरा कर रहा है।
जो का ये भी मानना है कि इस ऐप की सफलता की एक बहुत बड़ी वजह सराकार की एक-शिशु नीति है। वो कहते हैं कि बड़ा होते हुआ इकलौता बच्चा भावनात्मक रूप से अकेला महसूस करता है और इस वजह से आभासी दुनिया पर उसके निर्भर होने की काफी संभावना होती है।
विकास पांडे, बीबीसी मॉनिटरिंग