फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत-श्रीलंका के बीच 'चीन की दीवार' टूटेगी

Sun, 15 Feb 2015 10:41 AM IST
एल्मो फर्नांडो/बीबीसी की पूर्व कोलंबो संवाददाता
विज्ञापन
विज्ञापन
यह कोई छिपी बात नहीं है कि श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के दौर में चीन के बढ़ते असर को लेकर भारत गंभीर रूप से चिंतित था। इसलिए अब यह भी कोई खुफिया बात नहीं रही कि राजपक्षे के राष्ट्रपति चुनाव हारने से भारत ने राहत की सांस ली होगी।
विज्ञापन


राष्ट्रपति मैथ्रिपाला सिरिसेना का भारत दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब भारत श्रीलंका की स्थिति को लेकर कुछ हद तक निश्चिंत है। सिरिसेना भारत की इस निश्चिंतता का इस्तेमाल दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए करेंगे।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनको न्यौता देना भी इसी ओर इशारा करता है। भारत श्रीलंका के हम्मनटोटा में वाणिज्य दूतावास केंद्र खोल रहा है।

इसी जगह पर चीन के निवेश से हम्मनटोटा में बंदरगाह का निर्माण कार्य पूरा हुआ है। भारत इसे श्रीलंका पर चीन के बढ़ते असर के तौर पर देखता था।

चीन का बढ़ता दखल

हाल ही में जब एक चीनी पनडुब्बी कोलंबो पहुंची थी तो भारत के लिए यह चिंताजनक स्थिति बन गई थी।

उसकी नज़र में यह हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने की चीन की अप्रत्यक्ष कोशिश थी। इसके बाद भारत ने श्रीलंका से कई सवाल पूछे और जो जवाब मिले उनसे दोनों देशों के बिगड़ रहे कूटनीतिक रिश्तों को दुरुस्त करने में कोई मदद नहीं मिली।

श्रीलंका की सामपुर कोयला परियोजना भारत के लिए साफ़ इशारा था कि महिंदा राजपक्षे की दिलचस्पी चीनी परियोजनाओं में अधिक है और वह भारतीय परियोजनाओं को ज्यादा महत्व नहीं दे रहे थे।

श्रीलंका पर भारत में नाराजगी क्यों?

इन हालात में श्रीलंका को लेकर भारत में नाराजगी का माहौल पनपा। राष्ट्रपति पद संभालने के एक महीने के बाद मोदी का न्यौता स्वीकार करके सिरिसेना ने दिखाया कि वह दोनों देशों के रिश्तों को वापस पटरी पर लाने के लिए इच्छुक है।

एक क्षेत्रीय ताक़त के तौर पर भारत निश्चित रूप से इस क्षेत्र में किसी और देश की मौजूदगी नहीं देखना चाहता है। यहां तक कि सिरिसेना भारत का दौरा ऐसे वक्त में कर रहे हैं जब श्रीलंका कई मुश्किलों का सामना कर रहा है।

भारत ने श्रीलंका की दो बार मदद की है। एक बार तब जब श्रीलंका पर एक अमरीकी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के सामने पेश की गई थी लेकिन भारत ने श्रीलंका के ख‌िलाफ वोटिंग का बहिष्कार किया था।

इस बार ये साफ़ नहीं है कि भारत श्रीलंका को सहयोग देगा या नहीं। नॉर्दर्न प्रोविंशियल काउंसिल ने आम सहमति से एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि श्रीलंका के उत्तर में तमिलों के ख‌िलाफ नरसंहार हुआ था।

कुछ दिनों पहले सरकार के मंत्री लक्ष्मण किरील्ला ने कहा है कि भारत का दौरा कर नए राष्ट्रपति एक नया अध्याय लिखेंगे।
विज्ञापन

बेहतर संबंध, भारत का भरोसा

उन्होंने कहा, "श्रीलंका और भारत के बीच पहले कुछ मुद्दे थे, खासकर अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ। भारत की आबादी 1.4 अरब है और अगर हम भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाकर रख सकें तो हमें किसी और देश की ज़रूरत नहीं होगी।"

हालांकि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए श्रीलंका को सुलझाना है। इन मुद्दों में से ज्यादातर श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में सत्ता के विकेंद्रीकरण से संबंधित है। भारत चाहता है कि 13वें संविधान संशोधन को पूरी तरह से लागू किया जाए।

लेकिन नए राष्ट्रपति को उन लोगों की प्रतिक्रियाओं का सामना भी करना पड़ेगा जिन्होंने उनकी जीत में अपना समर्थन दिया था। श्रीलंका की जल सीमा में प्रवेश करने वाले भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई ने भी तमिलनाडु को उकसा दिया था।

राष्ट्रपति सिरिसेना के सामने एक चुनौती यह भी है कि वह भारत को यह भरोसा दिलाएं कि श्रीलंका गुटनिरपेक्षता की नीति में विश्वास करता है ताकि उसे भारत से आर्थिक सहायता और पूंजी निवेश मिलता रहे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें