भारत में मंदिरों और मज़ारों में जाने वाले श्रद्धालु अक्सर पुजारियों या ख़ादिमों के दान मांगने पर झुंझला जाते हैं। दुक़ानों से पूजा सामग्री ख़रीदने के लिए भी मजबूर किया जाता है। चीन में भी ऐसा होता है, पर सरकार ने अब इसका तोड़ निकाल लिया है।
ख़बर है कि श्रद्धालु धोखा न खाएं इसके लिए चीन में असली मंदिरों और धर्मस्थलों को 'नकली धर्मस्थलों' से अलग करने के लिए सर्टिफ़िकेट दिए जाएंगे।
चीन की अधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़, धार्मिक मामलों के अधिकारी असली बौद्ध और ताओ मंदिरों को प्रमाणपत्र दे रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक़ इसका उद्देश्य फ़र्ज़ी पुजारियों को धोखाधड़ी से रोकना है।
चीन में धार्मिक गतिविधियों से पैसा कमाने पर पाबंदी है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ ऐसी गैरधार्मिक जगहें हैं जहां नकली भिक्षु रखे जाते हैं, जो पर्यटकों को बहला-फ़ुसलाकर महँगा सामान ख़रीदने और दान देने के लिए उकसाते हैं।