पूरे देश में इस हादसे को लेकर दुख का माहौल और लोगों में आक्रोश भी है।
सोमवार को राजधानी ब्रासिलिया में फुटबॉल विश्वकप 2014 की उल्टी गिनती शुरु होनी थी और इस सिलसिले में फीफा के बड़े अधिकारी भी यहां मौजूद हैं। एक बड़ा जलसा होने वाला था लेकिन उसे रद्द कर दिया गया है। अगले महीने कार्निवल होने वाला है और उसकी तैयारियां चल रही थीं।
लोग इस बात से भी चिंतित हैं कि ये ब्राजील की छवि के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि हो सकता है ऐसे भी सवाल उठाए जाएं कि ब्राजील ओलंपिक या वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों के लिए तैयार नहीं है।
सोशल मीडिया पर मदद की गुहार
हादसे में मरने वाले ज़्यादातर किशोर थे। मेडिकल की एक 20-वर्षीय छात्रा ने आग लगने पर मोबाइल फोन से अपने फेसबुक पन्ने पर लिखा कि किस (क्लब का नाम) में आग लग गई है, कृपया मदद कीजिए। उसके बाद उसके परिवार और दोस्तों ने फेसबुक के जरिए उससे बात करना शुरु किया।
काफी लोग क्लब से अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट के जरिए मदद मांग रहे थे लेकिन कुछ देर बाद वहां से संदेश आना बंद हो गए। ये मेडिकल की छात्रा अपनी बहन और अपने बॉयफ्रेंड के साथ गई थी लेकिन कोई भी वापस नहीं आया।
भ्रष्टाचार का मामला?
'किस' नाम के जिस क्लब में ये हादसा हुआ है उसका आग से सुरक्षा के प्रमाणपत्र की समयसीमा खत्म हो चुकी थी। क्लब में 1000 लोगों के लायक ही जगह थी हादसे के वक्त वहां 2,000 लोग जमा थे।
बाहर निकलने के रास्ते भी कम थे और मुख्य दरवाजा भी बंद था जिसकी वजह से घटना हुई। इन सब चीजों की जानकारी रखना स्थानीय प्रशासन का काम होता है।
साफ है कि भ्रष्टाचार का मामला है क्योंकि शहर के बीचो-बीच इतना बड़ा क्लब चल रहा था और सुरक्षा के नियम-कानूनों का उल्लंघन हुआ है तो जाहिर सी बात है कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला होगा।
कई केंद्रीय मंत्री भी सांता मारिया में हैं। हालांकि ब्राजील में संघीय ढांचा है और इस तरह के हादसों से निपटने की स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी होती है लेकिन केंद्र सरकार ने काफी तेजी से काम किया है।
शोभन सक्सेना
(शोभन सक्सेना टाइम्स ऑफ इंडिया के ब्राजील के शहर साओ पाओलो-स्थित पत्रकार हैं)