इराक में हुए कई बम धमाकों में 60 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और दर्ज़नों लोग घायल हुए हैं।
इन बम धमाकों के निशाने पर सुन्नी समुदाय के लोग थे।
बग़दाद से क़रीब 50 किलोमीटर उत्तर में बाकुबा में हुए पहले हुए बम धमाके में कम से कम 41 लोग मारे गए। इसमें एक सुन्नी मस्ज़िद के बाहर दो धमाके हुए थे।
बाद में पुलिस ने कहा कि मदाइन में एक सुन्नी व्यक्ति की शवयात्रा में शामिल लोगों में से आठ व्यक्ति की मौत हो गई। इसके अलावा पश्चिमी बग़दाद में हुए दो बम धमाके में 14 और लोगों की मौत हो गई।
हाल के हफ़्ते में सांप्रदायिक हिंसा में आई तेज़ी के बाद ये बम धमाके हुए हैं।
सिलसिलेवार धमाके
बुधवार और गुरुवार को इराक में हुए कई बम धमाके में शिया बहुल क्षेत्रों को निशाने पर लिया गया। पिछले तीन दिनों में कुल 120 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं।
शुक्रवार को बाक़ुबा में पहला धमाका तब हुआ जब एक सुन्नी मस्ज़िद से शुक्रवार की नमाज़ के बाद लोग बाहर निकल रहे थे।
एक छात्र हाशिम मुनज़ीज ने रॉयटर्स को बताया, “मैं पहले धमाके वाली जगह से करीब 30 मीटर की दूरी पर था।”
“पहली दफ़ा जब बम विस्फोट हुए मैं मदद के लिए भागा तभी दूसरा बम फट गया। मैंने देखा कि लोगों के शरीर के चिथड़े उड़ रहे थे। मेरे गले पर भी बम का टुकड़ा लगा।”
कौन था निशाने पर
मदाइन में हुए बम धमाके में कम से कम 20 लोग मारे गए। इनमें से ज़्यादातर लोग एक स्थानीय मेयर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे।
अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी बग़दाद के सुन्नी बहुल व्यावसायिक क्षेत्र में एक दूसरा धमाका हुआ और 14 से ज़्यादा लोग मारे गए और कम से कम 30 लोग घायल हुए।
पश्चिमी बग़दाद के फलूज़ा में और राजधानी के दक्षिण में मौजूद डोरा में भी बम धमाका हुआ।
पिछले महीने से इराक में हिंसा में तब से तेज़ी आई है जब उत्तरी क्षेत्र के शहर हाविजा में एक सुन्नी सरकार विरोधी कैंप पर सेना ने छापा मारा जिसमें 50 लोग मारे गए।
प्रदर्शनकारियों ने सुन्नी समुदाय को निशाने पर लेने के लिए सरकार को आरोपी क़रार दिया था।