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ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, 'टीका नहीं, तो पैसा नहीं'

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ऑस्ट्रेलिया सरकार ने घोषणा की है कि बच्चों का टीकाकरण नहीं करवाने वाले माता-पिता को समाज कल्याण योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि नहीं दी जाएगी।
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इस "टीका नहीं, तो पैसा नहीं" नियम के अनुसार अभिभावकों को प्रति बच्चा सालाना 11,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक का नुक़सान उठाना पड़ सकता है।

मौजूदा नियमों के अनुसार धार्मिक या आध्यात्मिक कारणों का हवाला देते हुए बच्चों का टीकाकरण नहीं करवाने वाले परिवारों को बच्चों के पालनपोषण के लिए धन मिलता है। प्रधानमंत्री टोनी एबट ने कहा है कि नियमों में जल्द ही सख्ती लाई जाएगी।

एबट ने कहा कि नए नियमों में केवल कुछ ही धार्मिक या मेडिकल कारणों की छूट होगी। यह नियम विपक्षी लेबर पार्टी की सहमति से वर्ष 2016 की शुरुआत में लाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह बताने से इनकार कर दिया कि इससे कितना पैसा बचाया जा सकेगा।
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टीकाकरण के ख‌िलाफ मुहिम

एबीसी न्यूज ने प्रधानमंत्री एबट के हवाले से कहा है, "यह बेहद महत्वपूर्ण जन स्वास्थ्य घोषणा है। अपने बच्चों और परिवारों को अधिकतम सुरक्षा देने के लिए ये अहम कदम है।"

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को बच्चों का टीकाकरण न करवाने का फैसला करने वाले परिवारों से अन्य परिवारों को होने वाले खतरे की 'बहुत चिंता' है।

वहीं हाल के वर्षों में पश्चिम के कुछ देशों में टीकाकरण के ख‌िलाफ मुहिम छेड़ी गई है। मुहिम चलाने वालों का कहना है कि घातक बीमारियों से निपटने वाले टीके खतरनाक होते हैं।

ऑस्ट्रेलिया की सरकार का अनुमान है कि सात साल की आयु के 39,000 से अधिक बच्चों का टीकाकरण उनके माता-पिता के विरोध के कारण नहीं हुआ है। सामाजिक कल्याण मंत्री स्कॉट मॉरीसन का कहना है कि किसी भी मुख्य विचारधारा के धर्म ने इस सरकारी प्रस्ताव का विरोध नहीं किया है।
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