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अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने UN को कहा, भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं है

Fri, 05 May 2017 12:37 PM IST
amarujala.com- Presented By: मुकेश झा
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अटॉर्नी जनरल - फोटो : gettty
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पाकिस्तान ने अल्संख्यकों से बर्ताव को लेकर भारत की आलोचना की है। आलोचना के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को कहा है कि यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 27वें सत्र में अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अनेको प्रावधान हैं। 
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आइये बताते हैं कि भारत ने यूएनएचआरसी को क्या कहाः-

1.संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले अटार्नी जनरल रोहतगी ने कहा कि भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों के रक्षा के लिए अनेको प्रावधान हैं।

2. रोहतगी ने कहा कि भारत नागरिकों के जाति, नस्ल, रंग या धर्म में कोई भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा "भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं है।" उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हर व्यक्ति को धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में स्वतंत्र स्पीच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अपनी जगह सही है।
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3. रोहतगी ने सदस्य देशों से कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नाते हम स्वतंत्र स्पीच एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्व देते हैं। हमारे लोग अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर सचेत हैं और हर अवसर में अपनी पसंद का इस्तेमाल करते हैं।

5.पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीर मुद्दे को उठाया और भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा पैलट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने यूएनएचआरसी की टीम को कश्मीर की यात्रा और स्थिति की समीक्षा करने के लिए कहा। साथ ही भारत में अल्पसंख्यकों, सिखों, ईसाई और दलितों के खिलाफ "भीड़ हिंसा" का मुद्दा भी उठाया।

6. रोहतगी ने कहा "हम शांति, अहिंसा और मानव की गरिमा कायम रखने में यकीन रखते हैं। हमारी संस्कृति में प्रताड़ना पूरी तरह से अपरिचित है और राष्ट्र के शासन में इसका कोई स्थान नहीं है।"

7. रोहतगी ने आफ्सपा पर कहा कि यह अधिनियम सिर्फ अशांत इलाकों में लागू होता है और ये इलाके बहुत कम हैं और कुछ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास हैं।  साथ ही उन्होंने ने कहा कि "यह अधिनियम खत्म होगा या नहीं, मेरे देश में चल रही राजनीतिक बहस का विषय है।"
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