बांग्लादेश में पाबना जिले के एक गांव में हिंसक भीड़ ने हिंदुओं के घरों पर हमला बोला और 26 घरों में जमकर तोड़फोड़ की।
अल्पसंख्यक समुदाय के एक लड़के द्वारा कथित तौर पर ईशनिंदा की रिपोर्ट सामने आने के बाद ये लोग हिंसक हो गए। हाई कोर्ट ने हमलावरों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने और हिंदुओं की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने का आदेश दिया है।
घटना शनिवार की है। ईशनिंदा की रिपोर्ट पर गुस्साई भीड़ ने सांथिया उपजिले के बोनोग्राम गांव में हिंदुओं के घरों को निशाना बनाया। उपद्रवियों ने कई मूर्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। हमले के बाद फैली दहशत से यहां के करीब 150 परिवार घरबार छोड़कर भाग गए हैं।
घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने पुलिस महानिरीक्षक से कहा है कि इन हमलावरों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए जाएं।
स्थानीय थाना प्रभारी रिजाउल करीम ने बताया, ‘हमले में शामिल नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य लोगों की तलाश जारी है।’ पुलिस के मुताबिक ज्यादातर संदिग्ध मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी या उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता या समर्थक हैं।
यह घटना जमात-ए-इस्लामी प्रमुख मतिउर रहमान निजामी के गृह जिले में हुई, उनके खिलाफ युद्ध अपराध का मुकदमा चल रहा है।
थाना प्रभारी ने बताया कि अब वहां स्थिति सामान्य है। हाई कोर्ट की दो जजों की पीठ ने पुलिस प्रमुख से हमले की जांच और नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कारोबारी पिता द्वारा पैसे देने से मना करने पर उपद्रवियों (जिनमें ज्यादातर बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता थे) के एक समूह ने हिंदू छात्र राजिब साहा को साजिश के तहत ईशनिंदा में फंसाया।