श्रीलंका में सियासी दलों ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त करने के लिए राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के विवादास्पद फैसले के बाद पैदा हुए सत्ता संघर्ष के बीच संसदीय मामलों का संचालन करने के लिए एक चयन समिति बनाने का फैसला किया है। श्रीलंका के सभी दलों का यह फैसला देश में सियासी संकट हल करने के लिए राष्ट्रपति सिरीसेना द्वारा आयोजित सभी पार्टियों की बैठक के ठीक दूसरे दिन आया है।
सदन ने अब तक राजपक्षे और उनकी सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया है और सोमवार को सदन तीसरे परीक्षण के लिए भी तैयार हो गया। लेकिन दस मिनट बाद सदन को 23 नवंबर तक स्थगित कर दिया गया। सदन में उप सभापति आनंद कुमारसिरी ने कहा कि पार्टी नेताओं ने फैसला किया है कि संसदीय कामकाज चलाने के लिए एक चयन समिति नियुक्त की जाएगी। सोमवार को सत्र के दौरान राजपक्षे की विवादित सरकार की तरफ से दिनेश गुनावर्धन ने डिप्टी स्पीकर से पूछा कि वे चूंकि सरकार में थे इसलिए उन्हें समिति में बहुमत होना चाहिए।
इस बीच जेवीपी नेता अनुरा कुमारा डिसानायक ने तर्क दिया, चूंकि राजपक्षे सरकार ने बहुमत साबित नहीं किया है इसलिए चयन समिति बहुमत के आधार पर सदस्यों समूह के सदस्यों को स्थान देगी। पिछले दिनों श्रीलंका की संसद में चली हिंसा के बीच सोमवार का सत्र शांतिपूर्ण ढंग से चला। सोमवार को राजपक्षे के अनुरोध पर राजनयिकों के लिए सार्वजनिक और वीआईपी गैलरी बंद कर दी गई। अधिकारियों ने कहा कि इस दौरान किसी भी अप्रिय हादसे को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।