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सियासी संकट के बीच श्रीलंका में सभी पार्टियां चयन समिति के गठन पर हुईं सहमत

Mon, 19 Nov 2018 06:27 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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श्रीलंका में सियासी दलों ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त करने के लिए राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के विवादास्पद फैसले के बाद पैदा हुए सत्ता संघर्ष के बीच संसदीय मामलों का संचालन करने के लिए एक चयन समिति बनाने का फैसला किया है। श्रीलंका के सभी दलों का यह फैसला देश में सियासी संकट हल करने के लिए राष्ट्रपति सिरीसेना द्वारा आयोजित सभी पार्टियों की बैठक के ठीक दूसरे दिन आया है।

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सदन ने अब तक राजपक्षे और उनकी सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया है और सोमवार को सदन तीसरे परीक्षण के लिए भी तैयार हो गया। लेकिन दस मिनट बाद सदन को 23 नवंबर तक स्थगित कर दिया गया। सदन में उप सभापति आनंद कुमारसिरी ने कहा कि पार्टी नेताओं ने फैसला किया है कि संसदीय कामकाज चलाने के लिए एक चयन समिति नियुक्त की जाएगी। सोमवार को सत्र के दौरान राजपक्षे की विवादित सरकार की तरफ से दिनेश गुनावर्धन ने डिप्टी स्पीकर से पूछा कि वे चूंकि सरकार में थे इसलिए उन्हें समिति में बहुमत होना चाहिए।

इस बीच जेवीपी नेता अनुरा कुमारा डिसानायक ने तर्क दिया, चूंकि राजपक्षे सरकार ने बहुमत साबित नहीं किया है इसलिए चयन समिति बहुमत के आधार पर सदस्यों समूह के सदस्यों को स्थान देगी। पिछले दिनों श्रीलंका की संसद में चली हिंसा के बीच सोमवार का सत्र शांतिपूर्ण ढंग से चला। सोमवार को राजपक्षे के अनुरोध पर राजनयिकों के लिए सार्वजनिक और वीआईपी गैलरी बंद कर दी गई। अधिकारियों ने कहा कि इस दौरान किसी भी अप्रिय हादसे को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।

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संसद में दोबारा लाएं अविश्वास प्रस्ताव : सिरीसेना

श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने सांसदों से सरकार के खिलाफ दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लाने कहा है क्योंकि उन्होंने शुक्रवार को लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को असंवैधानिक करार दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय से सोमवार को जारी बयान के मुताबिक रविवार की शाम सिरीसेना ने सर्वदलीय बैठक, जिसमें कई सांसद मौजूद थे।

इसमें कहा कि वह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर तभी फैसला लेंगे जब उसके लिए नाम के जरिए या फिर इलेक्ट्रॉनिक मशीन के माध्यम से वोट डाले गये हों। उन्होंने कहा कि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मतदान करने की यही सबसे स्वीकार्य पद्धति हैं।

26 अक्तूबर से पैदा हुए सियासी संकट

संकट उस वक्त पैदा हुआ जब सिरीसेना ने अचानक 26 अक्तूबर को ऐलान किया कि उन्होंने पीएम विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर उनके स्थान पर नए प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की नियुक्ति की है। बाद में सिरीसेना ने संसद को भी भंग कर दिया। इसके बाद श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग कर नए चुनाव कराने के राष्ट्रपति के आदेश को निरस्त कर दिया। 
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