संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अफगानिस्तान की जेलों में अभी भी कैदियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। संगठन ने एक साल पहले अफगानी जेलों में इस तरह की यातना की बात को उजागर किया था।
संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने सबूतों के आधार पर कहा है कि पुलिस की छह जेलों में कैदियों को बाकायदा प्रताड़ित किया जाता है और अन्य जेलों में ऐसा ही किया जा रहा है। इनमें कुछ ऐसे जेल भी हैं, जिनका संबंध अफगान खुफिया सेवा से है।
जिन 600 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व कैदियों से इस बारे में बात की गई, उनमें से आधे से अधिक ने कहा कि जेल में उनके साथ बुरा सुलूक किया गया। इन कैदियों का कहना है कि उन्हें मारा-पीटा गया, बिजली के झटके लगाए गए और उनका यौन उत्पीड़न भी किया गया।
लेकिन अफगानिस्तान की सरकार का कहना है कि ये आरोप बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में प्रताड़ित करने वाली जिन जेलों का उल्लेख किया है, देश में तैनात नेटो सेना ने उन जेलों में कैदियों को स्थानांतरित करना बंद कर दिया है।
आरोप
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूनामा) की ये रिपोर्ट अक्तूबर 2011 से अक्तूबर 2012 के बीच राष्ट्रीय, स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा संचालित जेलों के कैदियों के बारे में थी। इसमें मार-पीट, हत्या की धमकी और यौन उत्पीड़न समेत यातना और दुर्व्यवहार के 14 तरीकों की पहचान की गई थी। जानकारी हासिल करने या जुर्म कबूल करवाने के लिए कुछ कैदियों को बिजली के झटके तक दिए गए।
यूनामा का कहना था कि हालांकि सरकार ने उसकी 2011 की रिपोर्ट में दिए गए प्रशिक्षण, निरीक्षण और निर्देश जैसे कुछ सुझावों को लागू किया था लेकिन दोषी अधिकारियों के मामलों की आगे जांच बहुत कम हुई। बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने ज़ोर देते हुए कहा कि जेलों पर नियंत्रण अफगानिस्तान की संप्रभुता का मामला है।
उन्होंने मांग की है कि अमरीका ने किसी अफगान को बंधक बना रखा है तो उसे अफगानिस्तान के हवाले कर दिया जाए। लेकिन नेटो कमांडरों ने चेतावनी दी है कि जेलों में क़ैदियों के साथ उत्पीड़न के मामलों को देखते हुए ऐसा किया जाना जल्द संभव नहीं है।