अफगानिस्तान की प्रथम महिला जीनत करजई पेशे से एक डॉक्टर हैं लेकिन आम लोगों के बीच कम ही देखी जाती हैं।
कई लोग इसी कारण उनकी आलोचना करते हुए कहते हैं कि वो अफगानिस्तान में महिलाओं की बेहतरी के लिए कुछ खास नहीं कर रही हैं।
लेकिन इस हफ्ते शायद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का ख्याल करते हुए वो बीबीसी से बात करने के लिए तैयार हो गईं। जीनत करजई ने बीबीसी की मरयम गमगुसार और फ्रेबा जाहिर से इस मौके पर खास बातचीत की।
काबुल स्थित राष्ट्रपति निवास में कड़े सुरक्षा के बीच वो रहती हैं और उन तक पहुंचने के लिए बीबीसी टीम को पांच जगहों पर सुरक्षा चेक करवाना पड़ा।
सुरक्षा की मजबूरी
शायद जीनत करजई को भी सुरक्षा के भारी भरकम इंतजाम से थोड़ी परेशानी होती होगी, तभी तो उन्होंने बातचीत की शुरूआत ही इसी से की और कहा कि हर वक्त इतनी कड़ी सुरक्षा में रहना बहुत मुश्किल है। मेरा बस चले तो मैं महल (राष्ट्रपति निवास) से बाहर रहना पसंद करूंगी।
और शायद यही कारण है कि ज़ीनत सार्वजनिक जगहों पर लगभग ना के बराबर दिखाई पड़ती हैं। बातचीत को आगे बढ़ाते हुए ज़ीनत कहती हैं कि मैं अफगानिस्तान के अंदरूनी इलाकों में कहीं भी नहीं गई हूं। मेरा संपर्क अफगानिस्तान की कई महिलाओं से है लेकिन वे सब मुझसे मिलने मेरे पास आती हैं, मैं उनके पास नहीं जा पाती हूं।
इस कारण अपनी आलोचना का जवाब देते हुए जीनत कहती है कि मैं जानती हूं कि मेरा जो भी योगदान है वो सार्वजनिक नहीं है और मीडिया में नहीं दिखता। लेकिन मैं जो भी कर सकती हूं और अफगानिस्तान के मौजूदा हालात में जो भी करना मुमकिन है, मैंने वो किया है।
उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान फिलहाल इस चीज़ के लिए तैयार नहीं कि देश की प्रथम महिला, राष्ट्रपति के साथ-साथ सार्वजनिक रूप से दिखे। जीनत कहती है कि ये देश पिछले 30 वर्षों से युद्घ झेल रहा है। हमें सब कुछ धीरे-धीरे और अपनी सभ्यता और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए ठीक करना है।
लेकिन ऐसा नहीं है कि जीनत बिल्कुल ही किसी से नहीं मिलती हैं। उन्होंने कई देशों की प्रथम महिला से मुलाक़ात की है और कई तो उनकी दोस्त भी बन गई हैं।
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की पत्नी शेरी ब्लेयर, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की पत्नी लौरा बुश, भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर की वो बहुत प्रशंसा करती हैं।
ईरान के राष्ट्रपति अहमदिनिजाद की पत्नी आजम अल-सादात फराही से वो बहुत नजदीक हैं और उनसे तो वो अक्सर फोन पर बातें करती हैं।
बेटा-बेटी एक समान
जीनत को एक छह साल का बेटा है जिसका नाम मीरवाइज़ है और एक छोटी बेटी है जिसका नाम मलाला है। अफगानिस्तान के समाज में बेटियों को बेटों की तुलना में कमतर समझा जाता है, लेकिन ज़ीनत कहती हैं कि वो और उनके पति राष्ट्रपति करज़ई बेटा और बेटी में कोई फ़र्क़ नहीं करते हैं।
इस बारे में वो कहती हैं कि बेटी, अल्लाह की तरफ़ से दिया गया सबसे बेहतरनी तोहफा है। अफगानिस्तान में कई महिलाएं बुर्क़ा पहनती हैं लेकिन जीनत के अनुसार बुर्का पहनने का रिवाज अफगानिस्तान में पहले से नहीं था, ये दूसरे देश से वहां पहुंचा।
जीनत के मुताबिक अफगानिस्तान की महिलाओं में एक बड़ा सा हेडस्कार्फ़ पहनने का रिवाज रहा है। अपने बचपन के बारे में बात करते हुए जीनत कहती है कि मेरे माता-पिता ने इस बात का ख्याल रखा था कि हम सभी बहनें पढ़ें और यूनिवर्सिटी जाकर उच्चा शिक्षा हासिल करें। हमारे परिवार के लिए ये बहुत अहम था।
अपने बच्चों के बारे में जीनत कहती हैं कि वो चाहती हैं कि वो दोनों भी उच्च शिक्षा हासिल करें और अगर उनकी इच्छा हो तो वो भी राजनीति के मैदान में आएं।