नए अध्ययनों से फिर ये संकेत मिला है कि जो लोग कोविड-19 के संक्रमण से पीड़ित होने के बाद ठीक हो जाते हैं, वे निश्चिंत नहीं रह सकते। उस स्थिति में भी नहीं, अगर उन्हें कोरोना संक्रमण के समय हल्के लक्षण ही उभरे हों। ऐसे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दूसरी समस्याओं से ग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। कुछ मामलों में ये समस्याएं बेहद गंभीर भी हो सकती हैं।
जानकारों के मुताबिक इसका मतलब यह है कि संक्रमण पर काबू पाने और पूरे टीकाकरण के बावजूद हेल्थ केयर सिस्टम पर दबाव बना रहेगा। उन्हें ऐसे लाखों लोगों की सेहत का ख्याल करना होगा, जो महामारी के दौर में कोविड-19 संक्रमण से पीड़ित हुए हैं। कुछ समय पहले ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन से ऐसी चेतावनी दी गई थी। अब एक हफ्ते के भीतर दो ऐसी नई अध्ययन रिपोर्टें अमेरिका में प्रकाशित हुई हैं।
एक अध्ययन रिपोर्ट नेचर पत्रिका में पिछले हफ्ते छपी। इसके मुताबिक जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए, लेकिन जिनके अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आई, उनके अगले छह महीनों में किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित होने की आशंका काफी बढ़ी रहती है। ऐसे लोगों की मृत्यु की आशंका उन लोगों की तुलना में 60 फीसदी ज्यादा रहती है, जो वायरस से संक्रमित नहीं हुए।
इस अध्ययन के मुताबिक ऐसे कोरोना मरीजों के ठीक होने के बाद के छह महीनों में चिकित्सा के लिए अस्पताल जाने की आशंका दूसरे लोगों की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा है। देखा गया है कि ऐसे लोग अलग-अलग अंगों की बीमारियों की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें मानसिक समस्याएं भी शामिल हैं। जो लोग संक्रमण का शिकार होने के पहले किसी बीमारी से पीड़ित थे, उनके बारे में अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि वे ऐसी समस्याओं से पीड़ित हो सकते हैं, जिनका इलाज जीवनभर जारी रखने की जरूरत पड़े।
अमेरिका के सेंट लुई हेल्थ केयर सिस्टम्स में अनुसंधानकर्ता जियाद-अल अलाई ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि अध्ययन के दौरान वो तमाम उपरोक्त बातें होने की मिसालें मिलीं। इस अध्ययन के मुख्य लेखक जियाद-अल अलाई ही हैं। उन्होंने अमेरिकी मीडिया से कहा है कि जब पूरी तस्वीर पर एक साथ नजर डाली गई, तो अंदाजा हुआ कि यह कितनी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा- ‘हम इसे देख कर भौंचक्के रह गए।’
इस स्टडी रिपोर्ट के एक दिन बाद एक दूसरी रिपोर्ट प्रकाशित हुई। उसमें पाया गया कि जिन लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ, लेकिन अस्पताल में दाखिल होने की नौबत नहीं आई, ऐसे लोगों ने ठीक होने के बाद 28 दिन से लेकर 180 दिन के भीतर कम से कम एक बार डॉक्टर के पास जाने की मजबूरी जरूर आई। कई ऐसे मरीजों को बार-बार डॉक्टर के पास जाना पड़ा है। अमेरिका में हुए इस अध्ययन में देखा गया कि जिन मरीजों को कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद बार-बार डॉक्टर के पास जाना पड़ा, उनमें महिलाओं, ब्लैक समुदाय के लोगों और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या ज्यादा थी।
अध्ययनकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के मामलों में हेल्थ केयर सिस्टम को लंबे समय तक इलाज मुहैया कराने के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। ब्राउन यूनिवर्सिटी के वॉरेन अल्पर्ट मेडिकल स्कूल एंड लाइफस्पैन हॉस्पिटल्स के अध्ययनकर्ताओं का कहना है- ‘हमारे पास हजारों लोग ऐसे सिस्टम के साथ आए हैं, जिनकी पहचान मुश्किल थी। हम उन लक्षणों के इम्यून सिस्टम पर हो सकने वाले असर को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इम्यून सिस्टम पर पड़े असर का मनुष्य के अंगों पर क्या प्रभाव होगा, हम उसे भी समझने की कोशिश कर रहे हैं।’ इन अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि अब तक हमारा जो हेल्थ केयर सिस्टम है, वह ऐसी समस्याओं के इलाज के लिए तैयार नहीं है।