अभी तक हम जानते थे कि तनाव बालों को हमेशा के लिए सफेद कर देता है। लेकिन अब शोध में खुलासा हुआ है कि अगर हम तनाव मुक्त हो जाएं तो सफेद बाल फिर काले हो सकते हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में किए गए इस अध्ययन में पहली दफा मनोवैज्ञानिक तनाव से सफेद होते बालों के संख्या आधारित (क्वांटिटेटिव) सबूत जुटाए गए हैं।
पहली बार हुआ बालों का संख्या आधारित अध्ययन
इस दौरान तनाव खत्म होने पर प्रतिभागियों के बाल फिर काले होने लगे। यह देखकर शोधकर्ता चकित रह गए। यह नतीजे हाल में चूहों पर हुए अध्ययन के एकदम उलट है। जिसमें पाया गया कि तनाव से बालों का सफेद होना स्थायी है।
'लाइफ' पत्रिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक, बालों के रंग पर तनाव के प्रभाव को लेकर वर्षों पुरानी अटकलों से परे इस अध्ययन का व्यापक महत्व है। उनका कहना है पुराने सफेद बालों के फिर से युवावस्था में लौटने की क्रियाविधि समझकर हमें इंसानी बुढ़ापे में लचीलापन आने के संकेत मिल सकते हैं।
बुढ़ापे रोकने के संकेत
पिकार्ड ने बताया हमारे आंकड़ों से उस बात को बल मिलता है कि मानवीय बढ़ावा स्थायी जैविक क्रिया नहीं है बल्कि इसे (कुछ हिस्सों में ही सही) रोका या अस्थायी तौर पर बदला भी जा सकता है।
बालों में है जैविक जानकारियां
बालों में जैविक इतिहास छिपा होता है। जब वह त्वचा में रोम के रूप में होते हैं। तब उन पर तनाव से शरीर में होने वाले बदलावों का असर पड़ता है। त्वचा के बाहर आकर यह सख्त हो जाते हैं। स्कैनर से देखे तो इनके रंग में बहुत हल्का परिवर्तन नजर आता है। शोध में इसी परिवर्तन को पकड़ा गया है।
छुट्टी पर वॉलिंटियर के बाल हुए काले
पिकार्ड के मुताबिक, 14 वालंटियरों के तनाव के आधार पर परिणामों की तुलना की गई। पाया गया छुट्टियों पर रहने के दौरान एक वॉलिंटियर के पांच बाल दोबारा काले हो गए। या फिर रंग बदला तो बालों के 300 प्रोटीन में परिवर्तन आया।
सफेद बाल वाले बुजुर्ग उन पर नहीं लागू
बाल एक हद तक ही सफेद होंगे। यह नहीं सोचना चाहिए कि वर्षों से सफेद बाल वाले 70 वर्षीय के बाल तनाव मुक्त होने से काले हो जाएंगे या 10 वर्षीय बच्चे में तनाव से बाल सफेद हो जाएंगे।