संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 2019 के अंत तक आठ करोड़ लोगों को युद्ध, हिंसा, उत्पीड़न व अन्य आपात परिस्थितियों के कारण जबरन विस्थापित होना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र रिफ्यूजी एजेंसी यूएनएचसीआर ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा, 2019 में अतिरिक्त 1.1 करोड़ लोग अकेले विस्थापित हुए और विकासशील देशों का हाल सबसे ज्यादा बुरा रहा।
यह बीते एक दशक की तुलना में लगभग दोगुनी संख्या है। वहीं, 24 लाख लोगों को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी, 86 लाख अपने ही देश की सीमाओं में विस्थापित हुए। यूएनएचआरसी ने विश्व रिफ्यूजी दिवस से दो दिन पहले जारी रिपोर्ट में कहा, वहीं, 3,17,200 शरणार्थी ही अपने देश वापस पहुंचने में सफल रहे, जबकि 1,07,800 शरणार्थियों को तीसरे देश में शरण लेनी पड़ी।
2019 के अंत तक पूरी दुनिया में 7.95 करोड़ यानी हर 97 में एक व्यक्ति को विस्थापित होना पड़ा। यूएनएचआरसी के उच्चायुक्त फिलिपो ग्रांडी ने कहा, संगठन ने जब से आंकड़े जुटाना शुरू किया है, तब से लेकर अब तक यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। लिहाजा यह बड़ी चिंता का विषय है। यह विश्व की आबादी का एक फीसदी है। सभी देशों में विस्थापन की समस्या है, लेकिन गरीब देशों में यह विकराल होती जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी ने बृहस्पतिवार को चेताया कि अगर वैश्विक परिवहन प्रणाली के लिए तत्काल वित्तीय सहायता नहीं मिली तो कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए 132 देशों को हजारों टन मास्क, दस्ताने और अन्य सामान पहुंचाने का काम जुलाई के तीसरे सप्ताह तक बंद हो जाएगा।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के अभियान के निदेशक आमिर दाउदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा, महामारी की शुरुआत से अभियान के तहत विमानों ने 2,600 मानवीय और स्वास्थ्यकर्मियों को निशुल्क अफ्रीका, एशिया और पश्चिम एशिया में पहुंचाया है लेकिन अब यह सेवा अब बंद होने के कगार पर है। उन्होंने कहा, महामारी का प्रकोप बढ़ना जारी है और ऐेसे में ये सेवाएं अधिक से अधिक आवश्यक हो गई हैं।
मांग को पूरा करने के लिए रोम स्थित डब्ल्यूएफपी को 2020 में जरूरी सामान के परिवहन के लिए 96.5 करोड़ डॉलर की जरूरत है, लेकिन अभी तक उसे सिर्फ 13.2 करोड़ डॉलर की राशि ही मिली है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण रुक नहीं रहा है और समूचा मानवीय एवं स्वास्थ्य समुदाय पहले से ज्यादा डब्ल्यूएफपी की सेवाओं पर निर्भर हो गया है।