यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में एक व्यापारिक जहाज पर हमले के बाद कई लोगों की जान गई है और दर्जनों लापता हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। अमेरिकी दूतावास का कहना है कि हूती विद्रोहियों ने जहाज को डुबोने के बाद बचे हुए चालक दल को अगवा कर लिया है। यह हमला न केवल समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी घोर उल्लंघन है।
यूरोपीय संघ की नौसैनिक मिशन ऑपरेशन अस्पिडेस ने जानकारी दी कि 'एटरनिटी सी' नामक जहाज पर 22 लोग सवार थे, जिनमें 21 फिलीपीनी और एक रूसी नागरिक शामिल थे। इसके अलावा, जहाज पर तीन सदस्यीय सुरक्षा टीम भी मौजूद थी। अब तक 10 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें एक भारतीय, एक ग्रीक और आठ फिलीपीनी नागरिक हैं। इस हमले में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
बचे हुए नाविकों को हूतियों ने अगवा किया- अमेरिका का दावा
अमेरिका ने हूती विद्रोहियों पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने हमले के बाद बचे हुए नाविकों को बंधक बना लिया है। अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर लिखा कि जहाज डुबोने और उनके साथियों की हत्या करने के बाद हूथियों ने कई नाविकों को अगवा कर लिया है। हम उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं। हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने कुछ नाविकों को बचाया और उन्हें इलाज के लिए सुरक्षित स्थान पर भेजा है, लेकिन उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी।
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जहाज पर घंटों चला हमला, वीडियो भी जारी
हूतियों ने 'एटरनिटी सी' पर किए गए हमले का वीडियो जारी किया है। वीडियो में जहाज पर गोलाबारी और ड्रोन हमले साफ देखे जा सकते हैं। बताया गया कि जहाज को घंटों तक निशाना बनाया गया और अंत में वह डूब गया। यह हमला उस 'मैजिक सीज' नामक जहाज पर हुए हमले के कुछ दिनों बाद हुआ है, जिसे हूतियों ने रविवार को डुबो दिया था।
फिलीपींस सरकार अपने नागरिकों के संपर्क में
फिलीपींस के प्रवासी कामगार मामलों के सचिव हंस काकडक ने बताया कि वे लापता नाविकों के परिजनों से लगातार संपर्क में हैं।उन्होंने कहा कि यह इंसान की फितरत है कि ऐसे वक्त में डर और चिंता होती है। सरकार का फर्ज है कि वह इन मुश्किल हालात में अपने लोगों के साथ खड़ी रहे और उन्हें हर तरह की मदद दे।
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इस्राइल से व्यापार के चलते बना निशाना?
एटरनिटी सी जहाज लाइबेरिया के झंडे के नीचे पंजीकृत था लेकिन इसका मालिकाना हक एक ग्रीक कंपनी के पास है। माना जा रहा है कि यह जहाज इस्राइली कंपनियों से जुड़े व्यापार के कारण हूतियों के निशाने पर आया। ईयू की सेना का कहना है कि जहाज ने सुरक्षा सहायता के लिए अनुरोध नहीं किया था, जिससे वह अकेला रह गया।