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नस्लीय मुद्दों पर मतभेद: सर्वे से सामने आया नस्ल के सवाल पर अमेरिका का सामाजिक विभाजन

Mon, 24 May 2021 03:59 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

सर्वे के नतीजे अमेरिका में गहरे सामाजिक ध्रुवीकरण की तरफ इशारा करता है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों प्रमुख पार्टियों में बुनियादी मुद्दों पर आम सहमति क्यों नहीं बनती। इस सर्वे के नतीजों से यह समझने में भी मदद मिलती है कि रिपब्लिकन पार्टी पर आज भी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मजबूत पकड़ क्यों बनी हुई है...
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अमेरिका - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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अमेरिका में नस्लीय मुद्दों पर डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच राय किस हद तक बंटी हुई है, ये बात एक ताजा सर्वे से जाहिर हुई है। साथ ही इससे सर्वे से नस्लीय भेदभाव के मामले में श्वेत और काले समुदाय की राय में भी गहरी खाई उभर कर सामने आई है। ये सर्वे अमेरिकी शहर मिनियापोलिस में ब्लैक नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की एक पुलिसकर्मी के हाथों हत्या की पहली बरसी पर कराया गया। जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के विरोध में अमेरिका में बड़े पैमाने पर आंदोलन छिड़ गया था, जिसमें कई जगहों पर हिंसा भी हुई। उसे दुनिया में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन से जाना गया।

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सर्वे इप्सोस एजेंसी ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के लिए किया। इसमें सिर्फ नौ फीसदी ब्लैक लोगों ने इस कथन से सहमति जताई कि अमेरिका एक नस्लभेदी देश नहीं है। जबकि श्वेत समुदाय के 28 फीसदी लोगों ने इस कथन से सहमति जताई। रिपब्लिकन पार्टी के श्वेत समर्थकों में 47 फीसदी ने कहा कि अमेरिका में नस्लीय भेदभाव नहीं होता है। वेबसाइट एक्सियोस ने सर्वे नतीजों का विश्लेषण करते हुए कहा है कि ये सर्वे अमेरिका में गहरे सामाजिक ध्रुवीकरण की तरफ इशारा करता है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों प्रमुख पार्टियों में बुनियादी मुद्दों पर आम सहमति क्यों नहीं बनती। इस सर्वे के नतीजों से यह समझने में भी मदद मिलती है कि रिपब्लिकन पार्टी पर आज भी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मजबूत पकड़ क्यों बनी हुई है।

अमेरिकी टीवी चैनल एचबीओ और एचबीओ मैक्स पर इस सर्वे नतीजे के विश्लेषण को लेकर एक कार्यक्रम प्रसारित किया गया। उसमें शामिल विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया कि ब्लैक समुदाय के लोग पुलिस के आचरण और रोजगार से लेकर राजनीति तक में अपनी नुमाइंदगी को लेकर असंतुष्ट हैं। जबकि कुल मिलाकर श्वेत समुदाय के लोगों का रुख मौजूदा व्यवस्था में किसी प्रकार के सुधार के खिलाफ है। एशियाई और हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) मूल के लोगों की राय इन दोनों ध्रुवों के कहीं बीच में है।
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लेकिन विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया कि सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी के श्वेत समर्थक बदलाव के लिए अधिक तैयार नजर आए। वैसे कुल 57 फीसदी श्वेत अमेरिकियों ने कहा कि पिछले साल की घटनाओं ने उन्हें इस बारे में सचेत किया कि देश में अभी भी नस्लभेद मौजूद है। इन 57 फीसदी श्वेत अमेरिकियों का अगर विश्लेषण किया जाए, तो उनमें 93 फीसदी वे हैं, जो डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक हैं। उधर 80 फीसदी ब्लैक अमेरिकियों ने कहा कि पिछले साल के आंदोलन के बाद वे अमेरिका में मौजूद नस्लभेद को लेकर अधिक जागरूक हुए हैं।

सर्वे एजेंसी इप्सोस यूएस पब्लिक अफेयर्स के अध्यक्ष क्लिफ यंग के मुताबिक इस सर्वे का संकेत यह है कि मध्य अवधि में देश की राजनीति नस्लीय मुद्दे पर गहरे ध्रुवीकरण का शिकार रहेगी। उन्होंने कहा- ‘अमेरिकी समाज बदल रहा है। हमारे उसूल बदल रहे हैं। समाज में गहरा विभाजन है। लेकिन समाज किस दिशा में जा रहा है, इसका संकेत भी सर्वे से मिला है। अगले दस साल में अमेरिकी समाज अधिक विभिन्नतापूर्ण होगा।’

फिलहाल, हालत यह है कि आम अमेरिकियों की निगाह में अमेरिका के कॉरपोरेट सेक्टर का यह दावा ज्यादा भरोसे के लायक नहीं है कि वह नियुक्तियों में समावेशी नीति अपना रहा है। सर्वे में ब्लैक समुदाय के सिर्फ 18 फीसदी लोगों ने कहा कि वे जहां काम करते हैं, वहां कुछ बदलाव आया है। ऐसा कहने वाले श्वेत अमेरिकियों की संख्या भी सिर्फ 18 फीसदी ही रही।

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