नेपाल में अमेरिकी दूतावास ने शनिवार देर शाम जारी बयान में कहा कि नेपाल को एक संप्रभु लोकतांत्रिक देश बनाने के लिए एमसीसी की पुष्टि करने या नहीं करने का फैसला नेपाली नेताओं का होगा और यह केवल नेपाल का ही निर्णय होगा।
अमेरिका ने सफाई दी है कि मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) को मंजूरी देना नेपाल का संप्रभु फैसला है। नेपाल में अमेरिकी दूतावास ने शनिवार देर शाम जारी बयान में कहा कि नेपाल को एक संप्रभु लोकतांत्रिक देश बनाने के लिए एमसीसी की पुष्टि करने या नहीं करने का फैसला नेपाली नेताओं का होगा और यह केवल नेपाल का ही निर्णय होगा। यह बयान नेपाल सरकार में सहयोगी दल और विपक्षी दलों के एतराज के बाद आया है।
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इन दलों का कहना है कि समझौते में संशोधन होना चाहिए क्योंकि इसके कुछ प्रावधानों से देश की संप्रभुता को खतरा हो सकता है। बयान में कहा गया है कि यह साल नेपाल और अमेरिका के बीच संबंधों का 75वां वर्ष है। इन 75 सालों के दौरान नेपाल ने कई बदलाव देखे हैं। इन बदलावों के दौरान हम नेपाल के साथ खड़े रहे हैं और विकास, आपदा, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में सहायता के लिए नेपाल के साथ रहे हैं।
अमेरिका और नेपाल के बीच 50 करोड़ डॉलर का समझौता 2017 में हुआ था। मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन के तहत अमेरिका यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विकास के लिए 50 करोड़ डॉलर देने वाला है। बयान में कहा गया है कि एमसीसी अमेरिकी नागरिकों की ओर से नेपाल को तोहफा है।
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इस समझौते में अमेरिका की ओर से नेपाल में बिजली की अल्ट्रा हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन बनाने का जिक्र है। इसका इस्तेमाल कर नेपाल, भारत को बिजली बेच सकेगा। इसके साथ ही कुछ सड़क परियोजनाओं का भी विकास होना है। इस समझौते में भारत की मंजूरी भी जरूरी है।