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एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन पर उठते सवालों का अंत नहीं, खुराक देने के तरीकों पर उठी उंगलियां

Sat, 05 Dec 2020 03:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को लेकर उठे विवादों की वजह से ही इस कंपनी के शेयरों के भाव उस तरह नहीं उछले हैं, जैसा फाइजर या मोडेरना के शेयरों के साथ हुआ है...
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी ने इस बारे में अलग-अलग ब्योरे दिए हैं कि उन्होंने अपने कोविड-19 वैक्सीन का कैसे परीक्षण किया। पहले इस वैक्सीन को अब तक आए सभी टीकों के बीच सबसे ज्यादा प्रभावी बताया गया था। लेकिन अब यह सवालों के घेरे में है। इसे बनाने में शामिल रही दो इकाइयों के ब्योरे के बीच जैसा अंतर देखने को मिला है, वैसा शायद ही पहले कभी हुआ हो। जानकारों के मुताबिक जिन लोगों पर टीके का परीक्षण किया गया, उन्हें दी गई खुराक के मामले में अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। बताया गया है कि कुछ लोगों को आधा डोज दिया गया, जबकि अधिकांश लोगों को दो पूरे डोज दिए गए।

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मीडिया में छपी जानकारियों के मुताबिक आधा डोज का पैटर्न 90 फीसदी प्रभावी पाया गया। जबकि दो फुल डोज की सफलता दर 62 फीसदी रही। ये निष्कर्ष अंतरिम डाटा के आधार पर निकाले गए हैं। एस्ट्राजेनेका के अनुसंधान प्रमुख ने पिछले महीने के आखिर में कहा था कि जिन लोगों ने प्रयोग में शामिल होने की सहमति दी थी, उनमें से कुछ को आधा डोज गलती से दिया गया। लेकिन इस विवरण का ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रमुख वैज्ञानिक ने खंडन किया। उन्होंने कहा कि आधा डोज सोच- समझकर दिया गया था। इसे देने के पहले पूरा विचार-विमर्श हुआ था।


जानकारों के मुताबिक खुराक के बारे में सामने आए अनिश्चय से डाटा के पुख्ता होने पर पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि इससे इस वैक्सीन को मंजूरी मिलने में देर हो सकती है। साथ ही इसमें आम लोगों का भरोसा घट सकता है। एडिनबरा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एलिनॉर रिली ने कहा कि अलग-अलग विवरण आना चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि जहां तक वैक्सीन का सवाल है, उनमें भरोसा होना सबसे अहम होता है। ऐसा कुछ नहीं किया जाना चाहिए, जिससे लोगों के भरोसे पर चोट पहुंचे।
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एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को लेकर उठे विवादों की वजह से ही इस कंपनी के शेयरों के भाव उस तरह नहीं उछले हैं, जैसा फाइजर या मोडेरना के शेयरों के साथ हुआ है। उन कंपनियों ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा प्रभावी हैं। जबकि एस्ट्राजेनेका के मामले में 90 फीसदी प्रभावी होने का दावा सिर्फ आधा डोज वाले प्रयोगों के आधार पर किया जा सका है। अलग-अलग विवरण सामने आने से उठे विवाद पर अभी तक एस्ट्राजेनेका ने कोई टिप्पणी नहीं की है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने कहा है कि प्रयोग के अंतरिम नतीजों की समकक्ष समीक्षा (पीयर रिव्यू) होने और उसके वैज्ञानिक जर्नल में छपने के बाद यूनिवर्सिटी मीडिया को इस बारे में जानकारी देगी। एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के लिए 20 से ज्यादा देश ऑर्डर दे चुके हैं। इनमें कई गरीब देश भी हैं। ये टीका दूसरी कंपनियों के टीके से काफी सस्ता है।

इसके परीक्षण का डाटा 23 नवंबर को जारी किया गया। तब ‘विश्व का वैक्सीन’ कहकर इसकी तारीफ की गई थी। उस समय इसको लेकर दुनिया भर में उत्साह पैदा हुआ था। लेकिन अलग-अलग विवरण से उठे विवाद के कारण अब इस पर पानी फिरता दिख रहा है।

कुछ वैज्ञानिकों ने एस्ट्राजेनेका के प्रयोग के छोटे सैंपल साइज पर भी एतराज किया है। हालांकि ऐस्ट्राजेनेका ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि आगे परीक्षण के और अधिक डाटा इकट्ठे किए जाएंगे और उनसे अंतरिम निष्कर्षों की पुष्टि होगी। कंपनी अब दुनिया में और अधिक परीक्षण करने पर विचार कर रही है, ताकि उसके निष्कर्षों के बारे में अधिक स्पष्टता आ सके।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने आगे और रिसर्च करने के विचार का समर्थन किया है। हालांकि यूनिवर्सिटी का कहना है कि अंतरिम विश्लेषण से यह साफ हो चुका है कि ये वैक्सीन बहुत प्रभावी है।

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