चीन के वैज्ञानिकों ने क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में ऐसी सफलता हासिल की है, जिसने दुनिया के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब तक माना जाता था कि क्वांटम फोटॉन बनाने के लिए शक्तिशाली और स्थिर लेजर जरूरी होती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने पहली बार सिर्फ सूर्य की सामान्य रोशनी की मदद से क्वांटम-लिंक्ड फोटॉन तैयार कर लिए। इन फोटॉनों की मदद से “घोस्ट इमेजिंग” तकनीक के जरिए कृत्रिम तस्वीर भी बनाई गई। इस उपलब्धि को भविष्य की अंतरिक्ष तकनीक और क्वांटम संचार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
आखिर वैज्ञानिकों ने क्या नया कर दिखाया?
अब तक क्वांटम ऑप्टिक्स में लेजर को सबसे जरूरी उपकरण माना जाता था। वैज्ञानिकों का मानना था कि बिना नियंत्रित और शक्तिशाली लेजर के क्वांटम स्तर पर जुड़े फोटॉन तैयार नहीं किए जा सकते। लेकिन चीन की शियामेन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस सोच को बदल दिया। शोधकर्ताओं ने सूर्य की प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल करके क्वांटम-लिंक्ड फोटॉन तैयार किए। इसके बाद इन फोटॉनों की मदद से “घोस्ट इमेजिंग” तकनीक द्वारा तस्वीर का पुनर्निर्माण किया गया। इस तकनीक में तस्वीर सीधे कैमरे से नहीं ली जाती, बल्कि क्वांटम संबंधों के जरिए तैयार होती है। इस शोध को जर्नल “एडवांस्ड फोटोनिक्स” में प्रकाशित किया गया है।
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धूप से क्वांटम तस्वीर कैसे बनाई गई?
वैज्ञानिकों ने एक खास स्वचालित सन-ट्रैकिंग प्रणाली तैयार की। यह सिस्टम पूरे दिन सूर्य की दिशा का पीछा करता रहा, ठीक वैसे ही जैसे टेलीस्कोप काम करता है। इसके जरिए सूर्य की रोशनी को 20 मीटर लंबे प्लास्टिक मल्टीमोड ऑप्टिकल फाइबर में भेजा गया। यह फाइबर रोशनी को एक अंधेरी प्रयोगशाला तक पहुंचाता है। वहां इस प्रकाश को पीपीकेटीपी नाम के विशेष नॉनलाइनियर क्रिस्टल पर डाला गया। इसी प्रक्रिया के दौरान क्वांटम फोटॉन जोड़े तैयार हुए।
पीपीकेटीपी क्रिस्टल क्या होता है?
पीपीकेटीपी यानी पीरियॉडिकली पोल्ड पोटैशियम टाइटेनिल फॉस्फेट एक विशेष प्रकार का क्रिस्टल है। इसका इस्तेमाल क्वांटम ऑप्टिक्स और फोटॉन आधारित प्रयोगों में किया जाता है। यह क्रिस्टल प्रकाश की तरंगों को खास तरीके से बदलने में मदद करता है, जिससे क्वांटम फोटॉन जोड़े बन पाते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि पहली बार यह साबित हुआ है कि सूर्य की प्राकृतिक रोशनी भी “स्पॉन्टेनियस पैरामेट्रिक डाउन-कन्वर्जन प्रक्रिया को सक्रिय कर सकती है। यही प्रक्रिया क्वांटम तकनीक में फोटॉन जोड़े बनाने के लिए सबसे अहम मानी जाती है।
इस सफलता को इतना बड़ा क्यों माना जा रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि भविष्य की क्वांटम तकनीकों को सस्ता और आसान बना सकती है। अभी तक ऐसे प्रयोगों के लिए महंगे लेजर सिस्टम की जरूरत पड़ती थी। अगर सूर्य की रोशनी से भी क्वांटम फोटॉन बनाए जा सकते हैं, तो भविष्य में छोटे और कम खर्च वाले क्वांटम उपकरण विकसित हो सकते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल अंतरिक्ष मिशनों, सुरक्षित संचार प्रणाली और हाईटेक इमेजिंग सिस्टम में किया जा सकता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इससे क्वांटम संचार को दूरदराज और अंतरिक्ष क्षेत्रों तक ले जाने में मदद मिलेगी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी यह प्रयोग शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं। आने वाले समय में इस तकनीक को और बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल करके क्वांटम तकनीकों को किस स्तर तक विकसित किया जा सकता है।