रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई पर ले जाने का आह्वान किया है। इसके लिए एक उच्च-स्तरीय 'नेशनल कमेटी' का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति के करीबी रणनीतिकार मैक्सिम ओरेशकिन करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में पश्चिमी निर्भरता को खत्म करना है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब सीमा पर ही नहीं, बल्कि तकनीक के मैदान में लड़ी जाएगी। पुतिन ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच एक ठोस तकनीकी और व्यापारिक तालमेल बिठाने का मास्टरप्लान तैयार किया है। पुतिन ने 'नेशनल कमेटी फॉर बिजनेस कोऑपरेशन' के गठन को ब्रिक्स के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया है।
विज्ञापन
क्या है यह नई कमेटी और क्यों है खास?
पुतिन के आदेश पर इसी साल फरवरी में यह कमेटी बनी। इसकी कमान राष्ट्रपति के विशेष दूत मैक्सिम ओरेशकिन को सौंपी गई है। पुतिन चाहते हैं कि रूस के बड़े उद्योगपति और बिजनेस घराने आगे आएं और भारत, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर ऐसे प्रोजेक्ट्स शुरू करें जो सीधे तौर पर पश्चिमी देशों की तकनीकी दादागिरी को चुनौती दे सकें।
तीन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
पुतिन ने कहा कि रूस उन व्यवसायों को खास प्रोत्साहन देगा जो स्वदेशी तकनीक पर निवेश करेंगे। इसमें तीन मुख्य क्षेत्रों पर सबसे अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): डेटा और बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना।
ऑटोनॉमस सिस्टम: रोबोटिक्स और स्वचालित परिवहन प्रणालियों को विकसित करना।
डिजिटल प्लेटफॉर्म: एक ऐसा स्वतंत्र इकोसिस्टम तैयार करना जहां व्यापार और लेनदेन के लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत न पड़े।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर नजर
रूस की इस रणनीति का सीधा लक्ष्य तेजी से विकसित हो रहे एशिया-प्रशांत और दक्षिण यूरेशिया के देशों के साथ जुड़ना है। पुतिन का मानना है कि ब्रिक्स इन क्षेत्रों के लिए सबसे मजबूत मंच है। उन्होंने रूसी उद्योग जगत को निर्देश दिया है कि वे विज्ञान, उद्योग, कृषि और रसद जैसे क्षेत्रों में ऐसे आधुनिक प्रोजेक्ट्स लाएं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों।
इस कमेटी में रूस की सबसे बड़ी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जिसका मतलब है कि आने वाले समय में रूस की ओर से ब्रिक्स के भीतर बड़े निवेश की नई लहर देखने को मिल सकती है। जानकारों का कहना है कि पुतिन का यह 'डिजिटल और टेक मास्टरप्लान' भविष्य के ब्रिक्स को एक आर्थिक मंच से ऊपर उठाकर एक शक्तिशाली तकनीकी ध्रुव के रूप में स्थापित कर देगा।