अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एक मुखबिर ने दावा किया है कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने हस्तक्षेप किया था। 2017 में रूस से निकाले गए इस मुखबिर ने कहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने "निजी" तौर पर चुनाव में हस्तक्षेप करने का आदेश दिया था।
सीआईए के अधिकारी अब इस मुखबिर की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। और ये अपने परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आना चाहता है। इससे पहले सीआईए भी कह चुका है कि रूस का मकसद चुनाव को रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में झुकाना था।
हालांकि ट्रंप हमेशा से ही इन दावों को बेतुका और राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज करते आए हैं। रूस के साथ संबंधों को लेकर अकसर ट्रंप की आलोचना होती रहती है। ट्रंप पर 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूसी मदद लेने का आरोप लगा था। उन्होंने हाल ही में कहा था कि वह 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार के बारे में किसी विदेशी सरकार से सूचना स्वीकार करना चाहेंगे।
इस मामले में अमेरिका के विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मूलर ने 22 महीने तक जांच की है। वह रूसी दखल वाली रिपोर्ट पर अपनी गवाही देने के लिए भी तैयार हो गए थे। 17 जुलाई को उन्होंने पहले जनता के सामने अपनी बात रखी और फिर हाउस ज्यूडिशियरी एंड इंटेलिजेंस कमेटी के सामने पेश हुए।
क्या लिखा है रिपोर्ट में?
ये रिपोर्ट 448 पेज की है। जिसमें 74 साल के मूलर ने लिखा है, "रूस की सेना के अधिकारियों ने डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी।" ये रिपोर्ट 18 अप्रैल को कानून मंत्रालय को सौंपी गई थी। हालांकि उन्होंने रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि रूसी दखल के मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं।
इस रिपोर्ट में लिखा है कि ट्रंप ने रूसी दखल की जांच को नियंत्रित करने की कोशिश की है। ट्रंप ने मूलर को हटाने की कोशिश भी की। मूलर 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल की जांच कर रहे थे और न्याय विभाग में पदस्थ थे। उन्होंने इस पद से मई के आखिर में इस्तीफा दे दिया था।