चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने बुधवार को अपनी वर्चुअल वीडियो शिखर वार्ता में अमेरिकी चुनौती का मिल कर मुकाबला करने का फिर इरादा जताया। लेकिन इस बैठक से उभरा सबसे अहम पहलू संभवतः यह है कि इन दोनों देशों ने एक नया वैश्विक वित्तीय ढांचा करने का फैसला किया है। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति का कार्यालय) ने शिखर बैठक से तुरंत बाद इस बारे में ब्योरा जारी किया। उसमें कहा गया कि नई वित्त व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिका उनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित ना कर सके।
अब पुतिन और शी जिनपिंग में यह सहमति बनी है कि रूस और चीन आपसी कारोबार का सेटलमेंट अपनी मुद्राओं में करेंगे। शिखर वार्ता के बाद पुतिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने रूसी वेबसाइट रशियाटुडे.कॉम को बताया- ‘एक स्वतंत्र वित्तीय ढांचा बने, इस बात पर खास ध्यान दिया गया। इस ढांचे का मकसद रूस और चीन के बीच व्यापार संबंधी सेवाएं देना होगा।’ पुतिन और शी में यह सहमति भी बनी कि दोनों देश अपने निवेशकों को एक-दूसरे के शेयर बाजारों में निवेश करने की सुविधा देंगे।
शिखर वार्ता शुरू होने से ठीक पहले क्रेमलिन के प्रेस सेक्रेटरी दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा था कि आर्थिक मुद्दे पुतिन और शी की बातचीत का प्रमुख एजेंडा होंगे। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि रूस और चीन दोनों अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर का इस्तेमाल खत्म करने के उपायों पर काफी समय से विचार कर रहे हैं। अब दोनों देशों ने पूरा आपसी कारोबार डॉलर से अलग रहते हुए करने का फैसला किया है।
इस साल के आरंभ में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि रूस और चीन को पश्चिमी नियंत्रण वाली भुगतान व्यवस्थाओं से अलग हो जाना चाहिए। उन्होंने तब आरोप लगाया था कि अमेरिका रूस और चीन के तकनीकी विकास में रुकावट डाल रहा है।