पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर झूठ बोलने के लिए लगभग हर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल किया है। साथ ही कश्मीरी मानवाधिकारों के रक्षक होने के कई दावे भी किए हैं। लेकिन, खुद अपने कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश करता रहा।
यहां रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों को लगातार पाकिस्तानी शासन द्वारा रौंदा गया है। अब जम्मू कश्मीर नेशनल अवामी पार्टी के चेयरमैन सरदार लियाकत हयात ने कश्मीर मुद्दे से निपटने में पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है कि पाकिस्तान कश्मीर को खुद में जोड़ने की बात ऐसे वक्त कर रहा है जब बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में भी वह मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने में विफल हो रहा है।
पाकिस्तानी नेता संसद और विधानसभाओं में कश्मीर को लेकर बयान दे रहे हैं। हमने सांसदों और विधायकों को इतना बेशर्म नहीं देखा। पीओके में भूमि और संसाधनों को धमकी के जरिये लूटा गया है। वहां के लोगों को ही मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया। पाकिस्तान की राजनीति में दखल रखने वाले सेना के अधिकारियों ने पीओके के लोगों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार किया है।