अमेरिका में नस्ली हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन
- फोटो : Twitter
अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से प्रदर्शनों का दौर जारी है। केंद्रीय बलों की तैनाती के विरोध में शनिवार को पोर्टलैंड, सिएटल, रिचमंड और ऑस्टिन समेत अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शन हुए। इस दौरान कई जगहों पर जमकर हिंसा हुई। आगजनी, तोड़फोड़ और गोलीबारी की घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी समेत कई लोग घायल हुए हैं। दो दर्जन से ज्यादा प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए हैं।
फ्लॉयड की मौत के बाद पुलिस की बर्बरता के खिलाफ शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई शहरों में केंद्रीय बलों की तैनाती के आदेश दिए हैं, जिसका प्रदर्शनकारी विरोध कर रहे हैं।
वर्जीनिया की राजधानी रिचमंड में शनिवार देर रात सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और केंद्रीय बलों की तैनाती के खिलाफ पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़ने लगे। रात करीब 11 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लौटने की चेतावनी दी और इस जमावड़े को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों पर इसका असर नहीं पड़ा और वे डटे रहे। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस गोले छोड़े।
वहीं, टेक्सास के ऑस्टिन शहर में प्रदर्शन के दौरान अचानक हुई गोलीबारी की घटना में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बल का प्रयोग किया और उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। ऑस्टिन पुलिस और आपात मेडिकल सेवा विभाग ने गोलीबारी में एक व्यक्ति के मारे जाने की पुष्टि की है।
सिएटल में पुलिस ने एक जेल के बाहर निर्माण के काम में लगे ट्रकों में आग लगाने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फ्लैशबैंग ग्रेनेड और काली मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया। वाशिंगटन राज्य में कई जगहों पर छोटे धमाकों के बाद धुआं उठता दिखा। आगजनी, तोड़फोड़, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने के आरोप में 25 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
यहां मई के आखिर से नस्लवाद और पुलिस की बर्बरता के खिलाफ रात में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पोर्टलैंड में भी राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर केंद्रीय बलों की तैनाती के बाद विवाद और बढ़ गया। यहां भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए।